गुरुवार, 23 अप्रैल 2015

आरक्षण क्यू

आरक्षण क्यूँ ?

नवभारत टाइम्स के ब्लॉग पर आरक्षण के विषय में कुछ लेख पढ़ने को मिले और उन्ही लेखों ने मुझे ये लेख लिखने को प्रेरित किया , जब बात आरक्षण की होती है तो सब भारतीय संविधान द्वारा अनुसूचित-जाती, जनजाति एवं अतिपिछड़ा वर्ग को मिले उस आरक्षण या विशेष अधिकारों की ही बात करतें हैं जिन्हें लागू हुए मुश्किल से 60 वर्ष ही हुए हैं ,कोई उस आरक्षण की बात नही करता जो पिछले 3000 वर्षों से भारतीय समाज में लागू थी

जिसके कारण ही इस आरक्षण को लागू करने की आवश्यकता पड़ी आज ''भारतीय गणराज्य का संविधान'' नामक संविधान, जिसका हम पालन कर रहें है जो 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ उससे पहले जो संविधान इस देश में लागू था जिसका पालन सभी राजा-महाराजा बड़ी ईमानदारी से करते थे उस संविधान का नाम था ''मनुस्मृति''

आधुनिक संविधान के निर्माता अंबेडकर ने सबसे पहले 25 दिसंबर 1927 को हज़ारों लोगों के सामने इस ''मनुस्मृति'' नामक संविधान को जला दिया ,क्यूंकी अब इस संविधान की कोई आवश्यकता नही थी भारतीय संविधान में आरक्षण का प्रावधान इसलिए दिया गया क्यूंकी इस देश की 85 प्रतिशत शूद्र जनसंख्या को कोई भी मौलिक अधिकार तक प्राप्त नही था

,सार्वजनिक जगहों पर ये नही जा सकते थे मंदिर में इनका प्रवेश निषिध था सरकारी नौकरियाँ इनके लिए नहीं थी , ये कोई व्यापार नही कर सकते थे , पढ़ नहीं सकते थे , किसी पर मुक़दमा नही कर सकते थे , धन जमा करना इनके लिए अपराध था , ये लोग टूटी फूटी झोपड़ियों में, बदबूदार जगहों पर, किसी तरह अपनी जिंदगिओं को घसीटते हुए काट रहे थे और यह सब ''मनुस्मृति'' और दूसरे हिंदू धर्मशास्त्रों के कारण ही हो रहा था कुछ उदाहरण देखिए-

1.संसार में जो कुछ भी है सब ब्राह्मानो के लिए ही है क्यूंकी वो जन्म से ही श्रेष्ठ है(मनुस्मृति 1/100)

2.स्वामी के द्वारा छोड़ा गया शूद्र भी दासत्व से मुक्त नही क्यूंकी यह उसका कर्म है जिससे उसे कोई नही छुड़ा सकता (8/413)

3.यदि कोई नीची जाती का व्यक्ति ऊँची जाती का कर्म अपना ले तो राजा उसे देश निकाला देदे (10/95)

4.बिल्ली, नेवला चिड़िया मेंढक, गढ़ा, उल्लू, और कौवे की हत्या में जितना पाप लगता है उतना ही पाप शूद्र (अनुसूचितजाती, जनजाति एवं अतिपिछड़ा वर्ग) की हत्या में है (मनुस्मृति 11/131) 

5.शूद्र का धन ब्राह्मण निर्भीक होकर छीन सकता है क्यूंकी उसको धन रखने का अधिकार नही (8/416)

6. सब वर्णों की सेवा करना ही शूद्रो का स्वाभाविक कर्तव्य है (गीता,18/44)

7. जो अच्छे कर्म करतें हैं वे ब्राह्मण ,क्षत्रिय वश्य, इन टीन अच्छी जातियों को प्राप्त होते हैं जो बुरे कर्म करते हैं वो कुत्ते, सूअर, या शूद्र जाती को प्राप्त होते हैं (छान्दोन्ग्य उपनिषद् ,5/10/7)

8. पूजिए विप्र ग्यान गुण हीना, शूद्र ना पूजिए ग्यान प्रवीना,(रामचरित मानस)

9.ब्राह्मण दुश्चरित्र भी पूज्‍यनीए है और शूद्र जितेन्द्रीए होने पर भी तरास्कार योग्य है (पराशर स्मृति 8/33)

10. धार्मिक मनुष्या इन नीच जाती वालों के साथ बातचीत ना करें उन्हें ना देखें (मनुस्मृति 10/52)

11. धोबी , नई बधाई कुम्हार, नट, चंडाल, दास चामर, भाट, भील, इन पर नज़र पद जाए तो सूर्य की ओर देखना चाहिए इनसे बातचीत हो जाए तो स्नान करना चाहिए (व्यास स्मृति 1/11-13)

12. अगर कोई शूद्र वेद मंत्र सुन ले तो उसके कान में धातु पिघला कर डाल देना चाहिए- गौतम धर्म सूत्र 2/3/4....

ये उन असंख्य नियम क़ानूनों के उदाहरण मात्र थे, जो आज़ाद भारत से पहले देश में लागू थे ये अँग्रेज़ों के बनाए क़ानून नहीं थे ये हिंदू धर्म द्वारा बनाए क़ानून थे जिसका सभी हिंदू राजा पालन करते थे प्रारंभ में तो इन्हें सख्ती लागू करवाने के लिए सभी राजाओं के ब्राह्मणों की देख रेख में एक विशेष दल भी हुआ करता था

इन्ही नियमों के फलस्वरूप भारत में यहाँ की विशाल जनसमूह के लिए उन्नति के सभी दरवाजे बंद कर दिए गये या इनके कारण बंद हो गये, सभी अधिकार, या विशेष-अधिकार, संसाधन, एवं सुविधायें कुछ लोगों के हाथ में ही सिमट कर रह गईं, जिसके परिणाम स्वरूप भारत गुलाम हुआ 

भारत की इस गुलामी ने उन करोड़ों लोगों को आज़ादी का अवसर प्रदान किया जो यहाँ शूद्र बना दिए गये थे , इस तरह धर्मांतरण का सिलसिला शुरू हुआ , बड़ी संख्या में लोगों ने इस्लाम ईसाइयत को अंगीकार किया , अंग्रेज़ो के शासन काल में उन्नीस्वी सदी के प्रारंभ से यहाँ पुनर्जागरण काल का उदय हुआ जिसके नायक यहीं के उच्च वर्गिए लोग थे जो अँग्रेज़ी शिक्षा, संस्कृति से प्रभावित हो कर देश में बदलाव लाने को प्रयत्नशील हुए ,

सती प्रथा को समाप्त किया गया स्त्री शिक्षा के द्वार खोले गये , शूड्रों को नौकरियों में स्थान दिया जाने लगा और कितनी ही क्रूर प्रताओं पर प्रतिबंध लगा दिया गया ,कई परिवर्थन्शील ,संगठनों का उदय हुआ ऐसे ही समय में अंबेडकर का जन्म हुआ , समाज में कई परिवर्तन हुए थे परंतु अभी भी शूड्रों के जीवन पर इसका कोई

अम्बेडकर का जीवन संघर्ष इस बात का उदहारण है , अम्बेडकर अपने समय के विश्व के पांच सबसे बड़े विद्वानों में से एक थे ,अपने जीवन के कड़े अनुभवों को ध्यान में रखकर उन्होंने अपना सम्पूर्ण जीवन सदियों से हिन्दू धर्म द्वारा दलित, उत्पीडित बहुसंख्य जनों के उत्थान को समर्पित करते हुए लम्बे संघर्ष में लगा दिया , जिस कारण दुनिया को पहली बार भारत के इस महान अभिशाप का ज्ञान हुआ और पशुओं का जीवन व्यतीत कर रहे उन करोड़ों लोगों को स्वाभिमान से जीवन जीने की ललक पैदा हुई , उन्होंने अपने जीवन के कीमती कई वर्ष हिन्दू समाज, हिन्दू धर्म, हिन्दू संस्कृति और हिन्दू धर्म शाश्त्रों के अध्यन में लगाये ,

अम्बेडकर के प्रयासों का ही नतीजा था की भारत के राजनैतिक और सामाजिक स्थिति का विश्लेषण करने के लिए ब्रिटिश सरकार ने सात सदस्सिए साइमन कमीशन को भारत भेजा जिसका अम्बेडकर ने स्वागत किया लेकिन कांग्रेस ने इसका बहिस्कार कर दिया, और कांग्रेस वर्किंग कमिटी द्वारा १९२८ में नए संविधान की रूप रेखा तैयार की गई जिसके लिए सभी धर्म एवं सम्प्रदायों को बुलाया बुलाया गया लेकिन अम्बेडकर को इससे दूर रखा गया 

१२ से १९ जनवरी १९३१ को गोलमेज की प्रथम कांफ्रेंस में पहली बार देश से बाहर अम्बेडकर ने अपने विचार रखे , और शूद्रो की सही तस्वीर पेश की इसी कांफ्रेंस में उन्होंने कानून के शाशन और शारीरिक ताकत की जगह संवैधानिक अनुशाशन की प्रतिष्ठा का दावा किया , सम्मलेन में जो ९ सब कमिटी बनी उन सभी में उन्हें सदस्य बना लिया गया , उनकी योग्यता उनके सारपूर्ण वक्तव्यों की वजह से यह संभव हो पाया, फ्रेंचाइजी कमिटी में उन्होंने दलितों के लिए अलग चुनाव क्षेत्र की मांग की और उनकी सभी मांगों को अंग्रेजी सरकार को मानना पड़ा 

अम्बेडकर की इस अभूतपूर्व सफलता ने कांग्रेस की नींद हराम कर दी क्यूंकि सवर्णों की इस पार्टी को डर हुआ की सदियों से जिन्हें लातों तले दबा के रखा , उनसे अपने सभी गंदे से गंदे काम करवाए, अगर उन्हें सत्ता मिल गई तब तो हमारी आने वाली पीडिया बर्बाद हो जाएँगी , हमारा धर्म जो इनसे छीन कर हमें सारी सुविधाएं सदियों से देता आया है वो संकट में पड जायेगा , यही सब सोच कर कांग्रेस के इशारों पर गाँधी ने अम्बेडकर को मिले अधिकारों के विरूद्ध आमरण अनशन की नौटंकी शुरू कर दी , जिसके कारण अंत में राष्ट्र के दबाव में आकर अम्बेडकर को "POONA - PACT " पर हस्ताक्षर करने पड़े जिसके अनुसार अग्रिम संविधान बनाने का मौका अम्बेडकर को दिया जाना तय हुआ बदले में अम्बेडकर को गोलमेज में मिले अपने सभी अधिकारों को छोड़ना पड़ा 

इस तरह वर्तमान संविधान का जो की मजबूरी में बना आधारशिला तैयार हुई जिसमें उन्होंने आरक्षण का प्रावधान डाला और दलितों के लिए सभी कानून बनाये अब जरा थोड़ी देर के लिए यह कल्पना कीजिये की अगर अम्बेडकर दलितों के लिए १०० प्रतिशत आरक्षण की मांग करते जो की उनका हक़ है तो क्या होता , परन्तु अम्बेडकर ने ऐसा नहीं किया ,

आज जब सरकारी नौकरियां वैश्वीकरण के नाम पर पूरे षड्यंत्र करी तरीके से समाप्त की जा रहीं हैं , ऐसे में शूद्र एक बार फिर हाशिये पर आगया है ,ऐसे में ये कहना की बचे खुचे आरक्षण को भी समाप्त कर दिया जाये एक बार फिर से शूद्र को गुलाम बनाने की सोची समझी साजिश ही तो है

आज जितने दलित अम्बेडकर के प्रावधानों के कारण सरकारी नौकरियों तक पहुचे हैं और सुख से दो जून की रोटी खा रहे हैं , उससे कहीं अधिक ब्रह्माण आज भी हिन्दू धर्म शाश्त्रों के सदियों पुराने प्रावधानों के कारण देश के लाखों मंदिरों में पुजारी बन अरबों-खरबों के वारे न्यारे कर रहे हैं और देश की खरबों की संपत्ति पर कब्ज़ा जमाये बैठे हैं क्या किसी ने इस आरक्षण को समाप्त करने की बात की....?

क्या किसी ने आज भी दलितों पर होने वालें अत्याचारों को रोकने के लिए आमरण अनशन किया ? क्या किसी ने मिर्च पुर, गोहाना, खैरलांजी,झज्जर,के आरोपियों के लिए फांसी की मांग की ? क्यूँ नहीं पहले ब्रह्माण क्षत्रिय और वैश्य अपने अपने जातीय पहचानों को समाप्त करते ? जाती स्वयं नष्ट हो जाएगी जाती नष्ट होते ही आरक्षण की समस्या सदा के लिए नष्ट हो जाएगी ,ऊपर की जाती वाले क्यूँ नहीं अपने बच्चों की शादियाँ दलितों के बच्चों संग करने की पहल करते ? लेकिन यहाँ तो बात ही दूसरी है इनके बच्चे अगर दलितों में प्रेम विवाह करना चाहें तो ये उनका क़त्ल कर देते हैं धन्य हैं

एक दलित मित्र अपने ब्लॉग में कहतें हैं की अब तो ऐसा नहीं होता तो श्रीमान जी जरा अख़बार पढ़ा करो पता चल जायेगा आज भी इस देश में संविधान के इतने प्रावधानों के बावजूद प्रत्येक दिन तीन दलितों को उनकी जाती के कारण मार दिया जाता है प्रत्येक दिन एक दलित महिला से उसकी जाती के कारण बलात्कार होता हे

किसने रोका है

""""झूठ ज्यादा दिन नहीं चलता""
(1)""विदेशों में जमा 500 लाख करोड़ काला धन लाने के लिए मोदी को किसने रोका।
(2) 15 लाख हर हिन्दुस्तानी खाते में जमा करने के लिए किसने मोदी को रोका।
(3) कश्मीर से धारा 370 हटाने के लिए मोदी को कौन रोक रहा है।
(4) पाकिस्तानियों के एक के बदले दस सिर लाने के लिए मोदी को कौन रोक रहा है।(5)
(5)गौ हत्या पर प्रतिबन्ध लगाने के लिए मोदी को कौन रोक रहा है।
(6) कश्मीरी पंडितों की वापसी के लिए मोदी को किसने रोका।
(7) मांस के व्यापार पर प्रतिबन्ध लगाने के लिए मोदी को किसने रोका।
(8) देश को हिन्दू राष्ट्र। घोषित करने के लिए मोदी को किसने रोका।
(9) जशोदा बेन को पी एम् हाउस में रहने के लिए किसने रोका।
(10) तथाकथित सोनिया गांधी का स्विस बैंक से खरबों रूपया लाने के लिए मोदी को किसने रोका है।
(11) राम मंदिर बनाने के लिए मोदी को किसने रोका।
(12) 100 नई स्मार्ट सिटी का काम अभी तक शुरू नहीं हुआ।
(13) लोकपाल की नियुक्ति अभी तक नहीं हुई।
(14) बुलेट ट्रेन पर कोई काम शुरू नहीं किया।
(15)देश की रक्षा की बड़ी बड़ी बातें करते थे, मोदी ने रक्षा बजट में 6000 करोड़ रूपए की कटौती की।
(16) देश के नागरिकों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़, स्वास्थ्य बजट में 7000 करोड़ रूपए की कटौती की।
(17) 09 महीने से महंगी विदेश यात्राओं पर अरबों रुपया बर्बाद किया जा रहा है।
(18) ओबामा की चमचागिरी में 500 करोड़ रुपये बर्बाद कर दिए।
(19) 09 लाख 27 हज़ार का सूट पहनने के लिए पैसा है, वैसे कांग्रेस ने खाजाना खाली कर दिया।
(20) भूटान नेपाल को हज़ारों करोड़ रूपए देने के लिए पैसा है वैसे कांग्रेस ने खाजाना खाली कर दिया।
(21) चीन 30 किलोमीटर अंदर आ गया, पाकिस्तान ने 120 हमारे सैन्य अधिकारी मार दिए, कहाँ गयी वो गीदड़ भभकी कि लाहोर तक कब्जा करेंगे, और एक के बदले दस सिर लाएंगे।
(22) इनका समर्थक वेद प्रकाश वैदेही  मुम्बई 26/11 ताज हमले का दोषी पाकिस्तानी आतंकवादी अफज़ल से मिलकर आता है उस पर कोई कार्यवाही नहीं।
(23) निहाल चंद बलात्कार का आरोपी मोदी सरकार में कैबिनेट मंत्री है।
(24) भ्रष्टाचारी पूर्व मुख्यमंत्री येदुरप्पा भाजपा का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष है।
(25) 12 वी पास और एक भी चुनाव नहीं जीती मोदी सरकार में शिक्षा मंत्री है।
(26) एक भी चुनाव नहीं जीते जेटली मोदी सरकार में वित्त मंत्री है।
(27) थूक कर चाटा।
पहले आपने ऍफ़  डी आई का विरोध किया जंतर मंतर पर धरना दिया अब मोदी ने आते ही ऍफ़ डी आई 99% तक की।
स्वदेशी की बात करते थे अब हर काम के लिए विदेशियों के पैर पकड़ रहे है।
(28) 09 महीने में गंगा की सफाई 01% भी नहीं हुई।
(29) 26 जनवरी ओबामा को बुलाकर 60 साल के सशक्त और समृद्ध विकाश की जानकारी दी, उसके बाद देशवासियों को बहकाते है कि कांग्रेस ने कुछ नहीं किया।
(30) अकबर उद्दीन ओबैशी जिसने भड़काऊ भाषण दिया था उस पर कोइ कार्यवाही नहीं की बल्कि महाराष्ट्र में सरकार बनाने के लिए उसकी पार्टी का समर्थन लिया।
(31) कश्मीर में मोदी जिसे बाप बेटी की सरकार और बाप बेटे की सरकार कहकर कोसते थे और जिनके ऊपर बीजेपी के संस्थापक अध्यक्ष श्यामा प्रसाद मुखर्जी को मरवाने का आरोप था आप उन्ही
लोगों के सामने बीजेपी गठबंधन की सरकार बनवाने के लिए गिड़गिड़ा रहे हो।
(32) जिस किरण बेदी ने बीजेपी को भ्रष्ट पार्टी कहा और मोदी को गोधरा काण्ड के लिए न्यायालय से बरी होने पर सवाल उठाये उसी किरण वेदी को सी एम् उम्मीदवार बनाया।
(33) एक तरफ कहते है कांग्रेस ने कुछ नहीं किया दूसरी तरफ कांग्रेस द्वारा पूर्ण की गयी परियोजनाओं
( जम्मू कटरा रेलवे लाइन, अग्नि 5, पी एस ऐल वी प्रक्षेपात्र, सबसे बड़ा समुद्र पोत इत्यादि) का फीता काटने बेशर्मी से पहुँच जाते हो।
(34) गुजरात में एक लड़की के पीछे आपने जासूस लगाये थे अब तक नहीं बताया वो जासूसी क्यूं करायी गयी थी।
(35) गुजरात न्यायालय ने शाह को तड़ीपार घोषित किया था आपने उसी को पॉर्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बना दिया।
(36) साधारण खाता खोलने की योजना को आपने जन धन योजना नाम दे दिया, जो की फ्लॉप हो गयी लाखों लोग खाता खोलने के बाद उसका संचालन नहीं कर रहे।
(37) योजना आयोग का नाम आपने नीति आयोग कर दिया काम वही रहेगा जो पहले होता था।
(38)कैग रिपोर्ट को अब आप सही नहीं मानते।
(39) सी बी आई अब भी सरकार का तोता है।
(40) कोई भी एक ठोस काम जो मोदी जनता को बता सके उन्होंने पिछले 09 महीने में किया हो, सिवाय दिन में चार बार मंहगी ड्रेस बदलने के, और लच्छेदार झूठे वादों के भाषण देने के।
जब मोदीजी पैदा भी नहीं हुए थे, तब
देश पाकिस्तान से एक युद्ध जीत चुका था| ����������������

मोदी जी जब बोलना भी नहीं सीखे थे तब भारत
एशियाई खेलों की मेजबानी कर चुका था|

मोदी जी जब घुटनों चलना सीख रहे थे तब
कांग्रेस ने हिन्दू विवाह बिल पास करवा के
महिला सशक्तिकरण शुरू कर दिया था|

मोदी जी जब तुतलाते थे जब हमारे देश में बड़े - बड़े
बांधोंऔर उद्योगों का निर्माण हो चूका था

मोदी जी जब गिल्ली डंडा खेलते थे तब भामा न्यूक्लियर
रिसर्च का उद्घाटन हो चूका था

मोदीजी जब नंगे पॉंव घूमते थे जब देश में ५ आई़़ आई
टी  स्वसंस्थान खुल चुके थे

मोदी जी जब अपनी नाक पोंछना सीखे थे तब नेहरु
जी ने नवरत्न कम्पनियाँ स्थापित कर दी थी

मोदी जी जब की अक्कल दाढ आई उस से पहले देश में
हरित -क्रांति हो चुकी थी

मोदीजी की मूंछ उगने से पहले भारत में श्वेत-क्रांति की शुरुआत हो चुकी थी|

मोदी जी जब कानूनी रूप से वयस्क हुए तब भारत ने
पकिस्तान को दो हिस्सों में बांटकर
बांग्लादेश का निर्माण कर दिया था

मोदी जी जब साईकल को ट्र्स्ट था देश में
मारुती कार आ गई थी

मोदीजी जब संघ कार्यालय में थे तब देश में सुपर
कम्प्यूटर , टेलीविजन और सूचना क्रांति ,
पी सी ओ का उदय हो गया था

मोदी जी जब गुजरात में केशु भाई
और वाघेला के खिलाफ साजिश रच रहे थे - तब देश में आर्थिक
उदारीकरण हो चूका था
चन्द्र यान , मंगल मिशन , जी एस एल, वी - ५ ,
मेट्रो , मोनो रेल , अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे,
न्यूक्लियर पनडुब्बी , मिसाइल , परमाणु
सयंत्र , तेजस , ड्रोनi , धनुष तोप , मिसाइल युक्त विमान ,
आई एन एस विक्रांत , एंटी बेलेस्टिक - सेफ्टिक मिसाइल ,
विमान वाहक पोत इत्यादि

मोदीजी की वक्त जब कुछ नही थी देश बहुतप्रगति कर चूका था

इतिहास के अज्ञानीअगर देश के लिए कुछ करना है तो यह
सन्देश 3 लोगो को भेजना है।
आपको सिर्फ 3 लोगो को मेसेज
करना है कि मोदी (बीजेपी) को वोट
ना करे। और वो 3 लोग भी दुसरे 3
लोगो को मेसेज करे।
इस प्रकार
1 = 3 लोग
यह 3 लोग 3 लोगो को मेसेज करेंगे
3×3 = 9
9×3 =27
27×3=81
81×3 =243
243×3 = 729
729×3 = 2187
2187×3 = 6561
6561×3 = 19683
19683×3 = 59049
59049×3 = 177147
177147×3 = 531441
531441×3 = 1594323
1594323×3 = 4782969
4782969×3 = 14348907
14348907×3 = 43046721
43046721×3 = 129140163
129140163×3 = 387420489
387420489×3=1,162,261,467
बस आपको तो एक कड़ी जोड़नी है देखते
ही देखते पूरा देश जुड़ जायेगा।
आज हमारे पास मोदी जी के झूठ से बचने का इससे
अच्छा विकल्प नहीं है।
और फिर whatsapp और facebook जैसे
सोशल मिडिया तो फ्री है ना

गुजरात की कुछ अनकही बाते

1.एक ऐसा राज्य है जिसके
दो मिनिस्टर जेल में है और दो बैल पे बहार घूम रहे है उसमे से
जो गृहमंत्री थे ओेर कुछ दिनों के लिए गुजरात से तडीपार किया गया था ये सब मिनिस्टर संगीन जुर्म में है

2.गुजरात एक ऐसा राज्य है
जहा विधानसभा और कैबिनेट ऑफ़ मिनिस्टर नाम के लिए है
वहा कभी विधानसभा नाम के लिए दो तिन दिन चलाई जाती है और कभी भी कैबिनेट क बैठक नहीं होती

3.गुजरात राज्य के 45%बच्चे कुपोषित है
जो भारत देश में सबसे जादा है

4.गुजरात राज्य की51%महिलाये औसत
वजन से कम वजन की है

5.गुजरात राज्य का शिक्षा क्षेत्र में18
क्रमांक है जो दस साल पहले
9वा क्रमांक था

6.गुजरात राज्य भारत का सबसे
ज्यादा कर्जबाजारी राज्य है
जो 175000करोड़ है
इसका मतलब गुजरात में हर एक आदमी पर
24हजार कर्ज है जो भारत में सबसे
ज्यादा है

7.भारत में सबसे ज्यादा टैक्स वसूलने
वाला राज्य गुजरात है

8.भारत मै सबसे कम
पढ़ा लिखा मुख्यमंत्री (less
educated) गुजरात का है

9.भारत में सबसे ज्यादा खुदपे खर्च करने
वाला cm गुजरात का है

10.भारत मैं सबसे
ज्यादा बेरोजगारी गुजरात में है l

Yeh hai Modi ke G[truncated by WhatsApp]

मनुवाd

हिन्दू (ब्राम्हण) धर्म का बड़ा विचित्र इतिहास ।।

=> मनु सूर्य के पुत्र थे, उनको छींक आने पर एक लड़का नाक
से निकला, जो राजा इक्ष्वाकु के नाम से जाना जाता था।
=> मंदोदरी मेंढकी से पैदा हुई थी।
=> मकरध्वज मछली से पैदा हुए थे।
=> श्रृंगी ऋषि हिरनी से पैदा हुए थे।
=> हनुमान के पिता पवन है, और वो भगद्वार से
नहीं बल्कि कान से पैदा हुए।
=> गणेश, जिसका आधा शरीर हाथी और आधा इंसान का था, अपने पिता से पैदा नहीं हुए थे।
=> राजा दशरथ की 3 रानियों के 4 पुत्र थे
जो फलो की खीर खाने से पैदा हुए थे।
=> कर्ण मंत्र द्वारा कुंती के कान से
और पांडव केवल मंत्रो के आह्वान से पैदा हो गये
और कौरव शुध्द देशी धी के डिब्बो से पैदा हो गये

ब्राम्हण(हिन्दू धर्म) महान हे ||

——
ब्राह्मणों के हर मंदिरों मे घूस देकर अलग से लाइन में खड़े लोगो को देखा जा सकता है ,
क्या कभी आपने किसी मस्जिद ,गुरुद्वारा ,गिरिजाघर ,बौद्ध विहारों में घूस देकर अलग से लाइन में खड़े लोगो को देखा है ??
मैंने तो कभी नहीं देखा !!
——
कुछ कड़वी मगर सच बातें,
अगर किसी का दिल दुखे तो माफ़ करना।

धन की देवी लक्ष्मी की पुजा सिर्फ हमारे देश मे की जाती है,
फिर भी देश की 75% जनता गरीबी और भुखमरी से लड रही है।।

शिक्षा की देवी सरस्वती की पुजा भी सिर्फ हमारे हि देश मे ही की जाती है ।।
फिर भी हमारे देश की गिनती सबसे अनपढ़ देशो मे होती है ।।

अन्न उत्पादन करने कि देवी माँ अन्नपुर्णा की पुजा भी सिर्फ हमारे देश मे होते है ।।
फिर भी हमारे देश के हजारो गरीब किसान हर साल अत्महत्या कर लेते है ।।

वर्षा के देवता इन्द्र की पुजा भी सिर्फ हमारे हि देश मे होती है।।
फिर भी कभी सुखा तो कभी बाढ़ आ जाती है ।।

स्त्री को हमारे यहा देवी का दर्जा दिया जाता है ।।
फिर भी दहेज के लिये हर साल हजारो औरतो को जिन्दा जला दिया

बुधवार, 22 अप्रैल 2015

माटी

एक कुम्हार माटी से चिलम बनाने जा रहा था..।
उसने चिलम का आकार दिया..।
थोड़ी देर में उसने चिलम को बिगाड़ दिया...l
माटी ने पूछा -: अरे कुम्हार, तुमने चिलम अच्छी बनाई फिर
बिगाड़ क्यों दिया.?
कुम्हार ने कहा कि-: अरी माटी, पहले मैं चिलम बनाने की सोच रहा
था, किन्तु मेरी मति (दिमाग) बदली और अब मैं सुराही या फिर घड़ा
बनाऊंगा,,,।
ये सुनकर माटी बोली-: रे कुम्हार, मुझे खुशी है कि, तेरी तो मति
बदली, मेरी तो जिंदगी ही बदल गयी...l
चिलम बनती तो स्वयं भी जलती और दूसरों को भी जलाती,,, अब
सुराही बनूँगी तो स्वयं भी शीतल रहूँगी ...और दूसरों को भी शीतल
रखूंगी...l
"यदि जीवन में हम सभी
सही फैसला लें...तो हम स्वयं भी खुश रहेंगे.., एवं दूसरों को भी
खुशियाँ दे सकेंगे।

Baba in colambia

‘‘दुनिया में सर्वश्रैष्ठ : बाबा साहेब डॉ. बी. आर. अम्बेडकर’’आज हम डॉ. अम्बेडकर के एक ऐसे चमत्कारऔर उस दौर की बात कर रहे है जो समय उन्होने न्यूयार्क, अमेरिका में 1913 से 1916 के बीच कोलम्बिया युनिवर्सिटी में बिताया ।ऐसा डॉ. अम्बेडकर और बड़ोदा महाराज के बीच हुऐ करार से सम्भव हो पाया जिसके अन्तर्गत 10 वर्षों तक रियासत की सेवा करने का करार । जिसके तहत डॉ. अम्बेडकर को उच्च शिक्षा के लिए अमेरिका भेजना तय हुआ । बीसवीं शताब्दी में डॉ. अम्बेडकर ऐसे प्रथम श्रेणी के राजनेताओं में पहले व्यक्ति थे । जिन्होने अमेरिका जाकरउच्च शिक्षा प्राप्त की ।जून 1916 में उनके द्वारा किये गये शोध ‘‘नेशनल डिविडेन्ड इन इण्डिया ए हिस्टोरिक एण्ड ऐनेलेटिक स्टेडी’’ पर शोध विश्वविद्यालय में प्रस्तुत किया । जिस पर डॉ. अम्बेडकर को (डॉक्टर ऑफ फिलोसॉफी) पी. एच. डी. की उपाधि से सम्मानित किया गया । डॉ. अम्बेडकर कि इस सफलता से प्रेरित होकर ‘‘कला संकाय के प्राध्यापकों औरविद्यार्थीयों’’ने एक विशेष भोज देकर डॉ. अम्बेडकर का सम्मान किया जो महान व्यक्ति अब्राहन लिंकन व वांशिगटन की परम्परा का अनुसरण था । ‘‘इस शोध प्रबंध में डॉ. अम्बेडकर ने बिट्रिश सरकार द्वारा भारत के आर्थिक शोषण की एक नंगी तस्वीर दुनिया के सामने रखी जो आज एक ऐतिहासिक दस्तावेज है’’ ।डॉ. अम्बेडकर द्वारा सामाजिक न्याय व समता के संबंध में भारतीय दलित समाज के लिए उनके द्वारा किये गये ‘‘सविधान निर्माण’’ की उपलब्धि से प्रभावित होकर ‘‘कोलम्बिया विश्वविद्यालय न्यूयार्क, अमेरिका ने जून 1952 में’’ डॉ. अम्बेडकर को ‘‘डॉक्टर ऑफ लॉ’’ की मानद उपाधि प्रदानकी ।इस कोलम्बिया विश्वविद्यालय न्यूयार्क अमेरिका ने जिसकी स्थापना वर्ष 1754, के 250 वर्ष (1754 से 2004) पूरे होने के उपलक्ष में वर्ष 2004 मे अपने 250 वर्ष के पूर्व विद्यार्थीयों मेसे, ऐसे 100 पूर्व विद्यार्थीयों Columbians ahead of their time, (shorted list of Notable persons) को चुना गया जिन्होने दुनिया में महान कार्यकिये और जो अपने - अपने क्षेत्र में महान रहे, ‘‘ जिसमें 1 मात्र भारतीय डॉ.बी. आर. अम्बेडकर व 3 अमेरिका के राष्ट्रपति, थॉडोर रूजवेल्ट, फ्रेकलिन रूजवेल्ट, डोविट एसनहॉवर, 6 अलग- अलग देशों के राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री जिसमें राष्ट्रपतियों में जार्जिया के मिखैल साकाश्वीली, इथोपिया के थामस हेनडीक, प्रधानमंत्री में इटली के गियूलिनो अमाटो, अफगानिस्तान के अब्दुल जहीर , चीन के तंग शोयी, और पोलेण्ड के प्रधानमंत्री शामील है, तथा कई मंत्री, 40 से अधिक नोबल पुरस्कार विजेता, अमेरिकन सुप्रीम कोर्ट के प्रथम मुख्य न्यायाधीश, 8 अन्य सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश, 22 से अधिक अमेरिकी राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता, 5 कोलम्बिया विश्वविद्यालय के संस्थापक पितामह, 16 फोरर्चून कम्पनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारी, सर्वाधिक धनवान व्यक्तियों में शामिल वारेन बफेट, फिलोशोफर जॉन डेव (डॉक्टर अम्बेडकर के गुरू), कई पुलीत्जर पुरस्कार विजेता, ऑस्कर पुरस्कार विजेता, फिल्म मेकर, पत्रकार, इतिहासकार, कवि, पर्यावरणविद्, वैज्ञानिक, चिकित्सक, गीतकार, लेखक, शिक्षाविद्,खिलाडी, गवर्नर, आई.बी.एम. के संस्थापक आदि महान विभूतियां शामिल है ।कोलम्बियां युनिवर्सिटी में ऐसे 100 पूर्व विद्यार्थीयों के लिये एक स्मारक बनाया गया जिस पर इन 100 महान विभूतियों के नाम लिखे गये । इन सभी सम्मानित 100 पूर्व विद्यार्थीयों के नाम को सही क्रम में लगाने के लिए वहां कि विद्वानों की एक कमेटी बनाई गई । उस कमेटी ने भारतीय संविधान के रचयिता तथा आधुनिक भारत के संस्थापकपितामह बाबा साहेब डॉ. बी. आर. अम्बेडकर का नाम प्रथम नम्बर (1) पर रखा ।इस स्मारक का अनावरण अमेरिकी राष्ट्रपति और नोबल पुरस्कार विजेता बराक ओबामा ने किया, यह स्मारक आज भी कोलम्बिया विश्वविद्यालय के केम्पस में शान सेखड़ा है ।वर्तमान में कोलम्बिया विश्वविद्यालय ने अपनी इस सूची में ओर कई नाम जोडने का फैसला किया है जिसमें वर्तमान अमेरिकी राष्ट्रपति व नोबल पुरस्कार विजेता बराक हुसैन ओबामा भी शामिल है तथा ओर भी कई नाम इसमें जोडे जा रहे है ।जबकि भारत में इस दलित विरोधी मीडीया में न तो कोई खबर है न ही कोई आवाज, एक सर्वे के अनुसार www.whopopular,indianleadarandpolitician की वेबसाइट में डॉ. अम्बेडकर नं. 1 रहे है । आज भी इन्टरनेट पर दुनिया में सबसे ज्यादा सर्च किये जाने वाले महान व्यक्तियों में शामिल है ।वर्ष 2011 मे आक्सफोर्ड विश्वविद्यालय द्धारा बीते 10 हजार वर्षो में विश्व में ऐतिहासिक भूमिका निभाने वाले दुनिया की महान विभूतियों का एक सर्वे किया गया जो"The maker of the universe" शिर्षक के अन्तर्गत 100 महान विभूतियों को चुनागया जिसमें भगवान गोतम बुद्ध को प्रथम स्थान तथा भारतीय संविधान के रचयिता डॉ बाबा साहेब अम्बेडकर को चोथा स्थान मिला ।विश्व कि महान विभुतियों मे टॉप 10 में चोथा स्थान, 122 करोड भारतीयों के लिए गर्व की बात है , और यह भी कहा गया कि समय के साथ साथ डॉ अम्बेडकर के विचार प्रासंगिक होते जा रहे है ।अगस्त 2012, मे सी एन एन आई बी. एन. चेनल द्वारा द ग्रेटेस्ट इण्डियन शो आयोजित किया गया, जिसमे महानतम भारतीय का चुनाव किया गया । इस चुनाव मे 100 भारतीयो को सूचिबद्व किया, जिसमे से शीर्ष 10 भारतीयो को चुना गया ।जिसके लिए दुनियाभर से ऑनलाइन वोटिंग के आधार पर मोबाइल मिस्डकॉल, इन्टरनेट द्वारा वोटिंग की गई । जिसमे सर्वाधिक मत डॉ बाबा साहेब डॉ अम्बेडकर को ही मिले, और उन्होने ग्रेटेस्ट इण्डियन की दौड़ मे सबको पीछे छोड़ दिया । शो मे कुल 80,97,243 वोट दिये गये, जिसमे डॉ. बी.आर. अम्बेडकर को 19,91,734, के अतिरिक्त अब्दुल कलाम आजाद 13,74,431, सरदार पटेल5,58,835, अटल बिहारी वाजपेयी 1,67,378, मदर टेरेसा 92,645, जे.आर.डी. टाटा 50,407 सचिन तेंदुलकर 47,706, इन्दिरा गांधी 17,641, लता मंगेशकर 11,520, जवाहर लाल नेहरू 9,920 मत मिले ।जिसमे जनता ने सर्वाधिक 25 प्रतिशत वोट, लगभग 20 लाख, अकेले डॉ. बी.आर. अम्बेडकर को दिये गये, जबकि इस महानतम भारतीय चुनने की प्रक्रिया मे मोहनदास करमचन्द गांधी को अलग रखा गया । उन्हे बिना वोटिंग पहले ही महानतम भारतीय मान लिया गया । आप समझ सकते है कि यह मिडिया की करतूत है । शायद उन्हे महान भारतीय न चुने जाने का डर रहा होगा, अन्यथा वे ऐसा नही करते, क्योकि ( बिना वोटिंग ) बिना चुनाव के ही, किसी को प्रथम मान लेना, स्पष्टतः पक्षपातपूर्ण रवैये को दर्शाता है, क्योकि आप समझ सकते है किदेश के पहले प्रधानमन्त्री 10 वे नम्बर पर है, और वोटिंग मे उनका प्रतिशत, दशमलव 10 प्रतिशत है । जो एक प्रतिशत से भी बहुत कम है ।जिस तरह का सक्रिय मीडिया हमारे देश में है यह हमारी लिए बहुत अच्छी बात है । लेकिन दलितों की खबरे आते ही पतानहीं इसकी सक्रियता कहा चली जाती है, ऐसा बर्ताव करता है , कि जैसे कि कुछ हुआ ही नहीं हो । उसी दलित विरोधी भावना को दोहराते हुए , उसने डॉक्टर अम्बेडकर के इस कारनामें को दबाने का प्रयास किया, जो मिडीया की निष्पक्षता पर प्रश्नचिन्ह खडा करता है , जिस टी.आर.पी. के लिए यह छोटी सी खबर को सनसनीखेज बनाने वाला , और छोटे से मुददे को बवन्डर बनाने वाला यह मीडिया , दलित खबर में इसकी यह कार्यकुशलता पता नहीं कहा खो जाती है । उच्च वर्ग की एक छोटी सी खबर का जिस प्रकार सीधा प्रसारण किया जाता है जैसे कि वह देश की सबसे बडी खबर हो । आज मीडियाकर्मी इस महान व्यक्ति के द्वारा बनाये गये संविधान से प्राप्त अधिकारों की बात करते है लेकिन जिस प्रकार इनके साथ भेदभाव करते है यह उनकी हिन भावना की धोतक है।सम्पूर्ण भारत मे एक मात्र महाराष्ट्र के मुख्य समाचार पत्र सामना ने 9 नवम्बर 2011 को इस ऐतिहासिकखबर को मुख पृष्ठ पर स्थान दिया । नहीं तो जो व्यक्ति भारत से इकलोता होने के साथ साथ ऐसे महान लोगों की पंक्ति में आगे खडा हो, जिसकी छोटी सीहलचल सुर्खिया बन जाती हो । यह हमारे देश के 121 करोड लोगों के लिए एक बहुत बडे गर्व की बात है ओर जो 250 वर्षो के सर्वे के आधार पर उसे चुना गया हो इससे बडा चमत्कार कोई नहीं हो सकता, ना ही ऐसा भविष्य में होने की संभावना है । चूंकि वह दलित है इसलिए उसका जितेजी शोषण किया और उनके मरने के बाद भी यह दलित विरोधी मीडिया व लोग शोषण करने से नहीं चुकतेजिस देश में केवल खेल और मनोरंजन कराने वाले कई लोगों को कई डॉक्टरेट की मानद उपाधी दे दी जाती है जबकि डॉक्टर अम्बेडकर के मामले में इनका रवैया भेदभाव रहा था और रहा है ।ऐसी ही भावना के चलते बडे दुख की बात है कि जनवरी 1952 में सम्पूर्ण भारत के एकमात्र विश्वविद्यालय में डॉक्टर अम्बेडकर के द्वारा संविधान निर्माण पर पर उन्हें डॉक्टर ऑफ लिटरेचर की उपाधि प्रदान की । यह दलित शोषण की भावना को दर्शाता है ।हालांकि मेरा इस पर कोई विवाद नहीं है, मुझे तो इस बात पर भी संदेह है कि जिस प्रकार कोलम्बिया विश्वविद्यालय व विकिपेडिया की वेबसाइट द्वारा डॉ. अम्बेडकर का नाम नोटेबल लोगों की लिस्ट में दबाने का प्रयास किया गया । हाईलाइट नहीं किया गया । मुझे तो इस पर भी संदेह है कि, एक भारतीय होने के कारण उनके साथ किसी भेदभाव से इंकार नहीं किया जा सकता है क्योंकि हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि कोलम्बिया विश्वविद्यालय एक अमेरिकी विश्वविद्यालय है, डॉ. अम्बेडकर को जो सम्मान मिलना चाहियेउसे देने में वे बडा असहज महसूस कर रहे होगें, ।वैसा मेरा कोई विरोध नहीं है फिर भी जिस प्रकार वर्तमान अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा को राष्ट्रपति बनते ही शांति के लिए नोबल जैसे प्रतिष्ठित पुरस्कार से नवाजा गया । इससे आप इसकी विश्वसनीयता ओर अमेरिकी एकाधिकार को समझ सकते है ।डॉ. अम्बेडकर द्वारा सामाजिक न्याय व समतामूलक समाज के निर्माण में जो महान योगदान दिया । जिसके इतने बेहतरीन चौकाने वाले परिणाम आज हम देख रहे है । ऐसा उदाहरण दुनिया के इतिहास मे कहीं नहीं मिलता है ।जिसके फलस्वरूप आज दलितों की स्थितिमें तीव्र गति से ऐतिहासिक सुधार हुआ है जिसके परिणामस्वरूप आज भारतीय समाज में दलितों की पहचान बनना प्रारम्भ हो गई है जिसे दलित विरोधी मिडीया दबाने का प्रयास कर रहा है ।यह डॉक्टर अम्बेडकर के योगदान का ही परिणाम है कि आज हम इस बिन्दु पर अपनापक्ष रख रहे है, इसमें कोई संदेह नहींहै, वे दुनिया में सर्वश्रैष्ठ थे, और सर्वश्रैष्ठ रहेगे ।प. मदन मोहन मालवीय ने बाबा साहेब के अपार ज्ञान को समझकर एक बार लाहौर में 1935 में कहा था कि वे ज्ञान के भंडार हैं । असीमित ज्ञान के धनी हैं । उनके विश्वास और हिन्दू पौराणिक मान्यता के अनुसार वे देवी सरस्वती के पुत्र हैं । उनका ज्ञान आगध है । उनके ज्ञान की कोई सीमा नही है । उन्होंने इसी अपरिमित ज्ञान के आधारपर समाज और धर्म को सुधारना चाहा है, परन्तु धर्म के ठेकेदारों पर इसका कोई असर नहीं पड़ा है अगर हिन्दू धर्म को जीवित रखना है तो डॉ. अम्बेडकर के विचारों को मानकर चलना होगा । उनके अगाध ज्ञान की जितनी प्रशंसा की जाए वह सब थोड़ी ही होगी ।बाबा साहेब के केन्द्रिय सरकार ने एक्जीक्यूटिव सरकार बनने के उपलक्ष्य में 1944 में मालवीय जी ने हिंदू विश्वविधालय ( इस विश्वविधालयके संस्थापक स्वंय मालवीय जी थे ) मेंबाबा साहेब का स्वागत समारोह आयोजितकिया । इस अवसर पर मालवीय जी ने कहा कि - ‘‘जिस ज्ञान पर ब्राह्यणों ने एक छत्र अधिकार कर रखा था उसे डाक्टर साहेब ने अपनी प्रकांड विद्वता से छिन्न-भिन्न कर दिया है । इन्होंने किसी भी ब्राह्यण विद्वान से ज्यादाज्ञान अर्जित किया है । वे अपार, अगाधऔर असीम ज्ञान के भंडार है ।’’‘‘इसी गहन अध्ययनशीलता के कारण उनके तर्क अकाट्य होते थे, मान्य और प्रमाणिक होते थे । उनके इसी अथाह ज्ञान के कारण उनके घोर विरोधी महात्मा गांधी जैसे लोग भी उनकी विद्वता पवित्रता और राष्ट्रधर्मिता को मानते थे ।’’महारानी एलिजाबेथ ने डॉ. अम्बेडकर के महापरिनिर्वाण पर कहा कि - ‘‘दुःख की बात है कि महामानव डॉ. अम्बेडकर काजन्म भारत में हुआ । यदि इनका जन्म किसी अन्य देश में हुआ होता तो इनको सर्वमान्य विश्वविभूति में मान मिलता । ’’बाबा साहब जैसी महान शख्सियत के महापरिनिर्वाण पर लन्दन टाइम्स ने कुछ इस प्रकार उल्लेखित किया ‘‘भारत में ब्रिटिश शासन के अंतिम दिनों के राजनैतिक और सामाजिक इतिहास में डॉ. अम्बेडकर का नाम प्रमुखता से जगमगायेगा । उनका धीरज और दृढ़ निश्चय उनके चेहरे पर सदा झलकता था । उनकी बुद्धिमानी का सानी तीनों महाद्वीपों नहीं था, फिर भी उन्होंने अपनी बुद्धिमता का ढिंढ़ोरा नहीं पीटा । इसका कारण यह था कि उन्हें आडम्बर करना नहीं आता था । ’’यह इस बात को प्रमाणित करता है कि, बाबा साहेब न केवल इण्डिया मे बल्कि पूरी दुनिया मे सर्वश्रेष्ठ है । जिनके विचार, आजादी के हर बढते साल, के साथ-साथ, प्रासंगिकता होते चले जारहे है ।