मंगलवार, 21 मार्च 2017

शाहजहाँ का हरम

शाहजहाँ के हरम में ८००० रखैलें थीं जो उसे उसके पिता जहाँगीर से विरासत में मिली थी। उसने बाप की सम्पत्ति को और बढ़ाया। उसने हरम की महिलाओं की व्यापक छाँट की तथा बुढ़ियाओं को भगा कर और अन्य हिन्दू परिवारों से बलात लाकर हरम को बढ़ाता ही रहा।”(अकबर दी ग्रेट मुगल : वी स्मिथ, पृष्ठ ३५९)कहते हैं कि उन्हीं भगायी गयी महिलाओं से दिल्ली का रेडलाइट एरिया जी.बी. रोड गुलजार हुआ था और वहाँ इस धंधे की शुरूआत हुई थी।जबरन अगवा की हुई हिन्दू महिलाओं की यौन-गुलामी और यौन व्यापार को शाहजहाँ प्रश्रय देता था, और अक्सर अपने मंत्रियों और सम्बन्धियों को पुरस्कार स्वरूप अनेकों हिन्दू महिलाओं को

उपहार में दिया करता था।यह नर पशु, यौनाचार के प्रति इतना आकर्षित और उत्साही था, कि हिन्दू महिलाओं का मीना बाजार लगायाकरता था, यहाँ तक कि अपने महल में भी।सुप्रसिद्ध यूरोपीय यात्री फ्रांकोइस बर्नियर ने इस विषय में टिप्पणी की थी कि, ”महल मेंबार-बार लगने वाले मीना बाजार, जहाँ अगवा कर लाईहुई सैकड़ों हिन्दू महिलाओं का, क्रय-विक्रय हुआ करता था, राज्य द्वारा बड़ी संख्या में नाचने वाली लड़कियों की व्यवस्था, और नपुसंक बनाये गये सैकड़ों लड़कों की हरमों में उपस्थिती, शाहजहाँ की अनंत वासना के समाधान के लिए ही थी।(टे्रविल्स इन दी मुगल ऐम्पायर- फ्रान्कोइस बर्नियर :पुनः लिखित वी. स्मिथ, औक्सफोर्ड १९३४)शाहजहाँ को प्रेम की मिसाल के रूप पेश किया जाता रहा है और किया भी क्यों न जाए ,८००० औरतों को
अपने हरम में रखने वाला अगर किसी एक में ज्यादा रुचि दिखाए तो वो उसका प्यार ही कहा जाएगा।आप यह जानकर हैरान हो जायेंगे कि मुमताज का नाम मुमताज महल था ही नहीं बल्कि उसका असली नाम”अर्जुमंद-बानो-बेगम” था।और तो और जिस शाहजहाँ और मुमताज के प्यार की इतनी डींगे हांकी जाती है वो शाहजहाँ की ना तो पहलीपत्नी थी ना ही आखिरी ।मुमताज शाहजहाँ की सात बीबियों में चौथी थी । इसका मतलब है कि शाहजहाँ ने मुमताज से पहले 3 शादियाँ कर रखी थी और, मुमताज से शादी करने के बाद भी उसका मन नहीं भरा तथा उसके बाद भी उस ने 3 शादियाँ और की यहाँ तक कि मुमताज के मरने के एक हफ्ते के अन्दर ही उसकी बहन फरजाना से शादी कर ली थी। जिसे उसने रखैल बना कर रखा हुआ था जिससे शादी करने से पहले ही शाहजहाँ को एक बेटा भी था।अगर शाहजहाँ को मुमताजसे इतना ही प्यार था तो मुमताज से शादी के बाद भी शाहजहाँ ने 3 और शादियाँ क्यों की….?????अब आप यह भी जान लो कि शाहजहाँ की सातों बीबियों में सबसे सुन्दर मुमताज नहीं बल्कि इशरत बानो थी जो कि उसकी पहली पत्नी थी ।उस से भी घिनौना तथ्य यह है कि शाहजहाँ से शादी करते समय मुमताज कोई कुंवारी लड़की नहीं थी बल्किवो शादीशुदा थी और, उसका पति शाहजहाँ की सेना मेंसूबेदार था जिसका नाम “शेर अफगान खान” था।शाहजहाँ ने शेर अफगान खान की हत्या कर मुमताज से शादी की थी।गौर करने लायक बात यह भी है कि ३८ वर्षीय मुमताज की मौत कोई बीमारी या एक्सीडेंट से नहीं बल्कि चौदहवें बच्चे को जन्म देने के दौरान अत्यधिक कमजोरी के कारण हुई थी। यानी शाहजहाँ ने उसे बच्चेपैदा करने की मशीन ही नहीं बल्कि फैक्ट्री बनाकर मार डाला।शाहजहाँ कामुकता के लिए इतना कुख्यात था, की कईइतिहासकारों ने उसे उसकी अपनी सगी बेटी जहाँआरा के साथ स्वयं सम्भोग करने का दोषी कहा है।शाहजहाँ और मुमताज महल की बड़ी बेटी जहाँआरा बिल्कुल अपनी माँ की तरह लगती थी।इसीलिए मुमताज की मृत्यु के बाद उसकी याद में लम्पट शाहजहाँ ने अपनी ही बेटी जहाँआरा को फंसाकर भोगना शुरू कर दिया था।जहाँआरा को शाहजहाँ इतना प्यार करता था कि उसने उसका निकाह तक होने न दिया।बाप-बेटी के इस प्यार को देखकर जब महल में चर्चा शुरू हुई,तो मुल्ला-मौलवियोंकी एक बैठक बुलाई गयी और उन्होंने इस पाप को जायज ठहराने के लिए एक हदीस का उद्धरण दिया और कहा कि – “माली को अपने द्वारा लगाये पेड़का फल खाने का हक़ है”।(Francois Bernier wrote, ” Shah Jahan used to have regular sex with his eldest daughter Jahan Ara.To defend himself, Shah Jahan used to say that, it was the privilege of a planter to taste the fruit of the tree he had planted.”)इतना ही नहीं जहाँआरा के किसी भी आशिक को वह उसके पास फटकने नहीं देता था।कहा जाता है की एकबार जहाँआरा जब अपने एक आशिक के साथ इश्क लड़ा रही थी तो शाहजहाँ आ गया जिससे डरकर वह हरम के तंदूर में छिप गया, शाहजहाँ नेतंदूर में आग लगवा दी और उसे जिन्दा जला दिया।दरअसल अकबर ने यह नियम बना दिया था, की मुगलिया खानदान की बेटियों की शादी नहीं होगी। इतिहासकारइसके लिए कईकारण बताते हैं। इसका परिणाम यह होता था, की मुग़लखानदान की लड़कियां अपने जिस्मानी भूख मिटाने के लिए अवैध तरीके से दरबारी, नौकर के साथ साथ, रिश्तेदार यहाँ तक की सगे सम्बन्धियों का भी सहारा लेती थी।जहाँआरा अपने लम्पट बाप के लिए लड़कियाँ भी फंसाकर लाती थी। जहाँआरा की मदद से शाहजहाँ ने मुमताज के भाई शाइस्ता खान की बीबी से कई बार बलात्कार किया था।शाहजहाँ के राजज्योतिष की 13 वर्षीय ब्राह्मण लडकी को जहाँआरा ने अपने महल में बुलाकर धोखे सेनशा करा बाप के हवाले करदिया था जिससे शाहजहाँ ने 58 वें वर्ष में उस 13 बर्ष की ब्राह्मण कन्या से निकाह किया था।बाद में इसी ब्राहम्ण कन्या ने शाहजहाँ के कैद होने के बाद औरंगजेब से बचने और एक बार फिर से हवस की सामग्री बनने से खुद को बचाने के लिए अपने ही हाथों अपने चेहरे पर तेजाब डाल लिया था।शाहजहाँ शेखी मारा करता था कि ‘ ‘वह तिमूर (तैमूरलंग)का वंशज है जो भारत में तलवार और अग्नि लाया था।उस उजबेकिस्तान के जंगली जानवर तिमूर से और उसकी हिन्दुओं के रक्तपात की उपलब्धि से इतना प्रभावित था कि ”उसने अपना नाम तिमूरद्वितीय रख लिया”(दी लीगेसी ऑफ मुस्लिम रूल इन इण्डिया- डॉ. के.एस. लाल, १९९२ पृष्ठ- १३२).बहुत प्रारम्भिक अवस्था से ही शाहजहाँ ने काफिरों (हिन्दुओं) के प्रति युद्ध के लिए साहस व रुचि दिखाई थी।अलग-अलग इतिहासकारों ने लिखा था कि, ”शहजादे केरूप में ही शाहजहाँ ने फतेहपुर सीकरी पर अधिकार करलिया था और आगरा शहर में हिन्दुओं का भीषण नरसंहार किया था ।भारत यात्रा पर आये देला वैले, इटली के एक धनी व्यक्ति के अुनसार -शाहजहाँ की सेना ने भयानक बर्बरता का परिचय कराया था। हिन्दू नागरिकों को घोर यातनाओं द्वारा अपने संचित धन को दे देने के लिए विवश किया गया, और अनेकों उच्च कुल की कुलीन हिन्दू महिलाओं काशील भंग किया गया।”(कीन्स हैण्ड बुक फौर विजिटर्स टू आगरा एण्ड इट्सनेबरहुड, पृष्ठ २५)हमारे वामपंथी इतिहासकारों ने शाहजहाँ को एक महान निर्माता के रूप में चित्रित किया है। किन्तु इस मुजाहिद ने अनेकों कला के प्रतीक सुन्दर हिन्दू मन्दिरों और अनेकों हिन्दू भवन निर्माण कला के केन्द्रों का बड़ी लगन और जोश से विध्वंस किया था।अब्दुल हमीद ने अपने इतिहास अभिलेख, ‘बादशाहनामा’ में लिखा था-‘महामहिम शहंशाह महोदय की सूचना में लाया गया कि हिन्दुओं के एक प्रमुख केन्द्र, बनारस में उनके अब्बा हुजूर के शासनकाल में अनेकों मन्दिरों के पुनः निर्माण का काम प्रारम्भ हुआ था और काफिर हिन्दू अब उन्हें पूर्ण कर देने के निकट आ पहुँचे हैं।इस्लाम पंथ के रक्षक, शहंशाह ने आदेश दिया कि बनारस में और उनके सारे राज्य में अन्यत्र सभी स्थानों पर जिन मन्दिरों का निर्माण कार्य आरम्भ है,उन सभी का विध्वंस कर दिया जाए।इलाहाबाद प्रदेश से सूचना प्राप्त हो गई कि जिला बनारस के छिहत्तर मन्दिरों का ध्वंस कर दिया गया था।”(बादशाहनामा : अब्दुल हमीद लाहौरी, अनुवाद एलियट और डाउसन, खण्ड VII, पृष्ठ ३६)हिन्दू मंदिरों को अपवित्र करने और उन्हें ध्वस्त करनेकी प्रथा ने शाहजहाँ के काल में एक व्यवस्थित विकराल रूप धारण कर लिया था।(मध्यकालीन भारत – हरीश्चंद्र वर्मा – पेज-१४१)”कश्मीर से लौटते समय १६३२ मेंशाहजहाँ को बताया गया कि अनेकों मुस्लिम बनायी गयी महिलायें फिर से हिन्दू हो गईं हैं और उन्होंने हिन्दू परिवारों में शादी कर ली है।शहंशाह के आदेश पर इन सभी हिन्दुओं को बन्दी बना लिया गया। प्रथम उन सभी पर इतना आर्थिक दण्ड थोपा गया कि उनमें से कोई भुगतान नहीं कर सका।तब इस्लाम स्वीकार कर लेने और मृत्यु में से एक को चुन लेने का विकल्प दिया गया। जिन्होनें धर्मान्तरण स्वीकार नहीं किया, उन सभी पुरूषों का सर काट दिया गया। लगभग चार हजार पाँच सौं महिलाओं को बलात् मुसलमान बना लिया गया और उन्हें सिपहसालारों, अफसरों और शहंशाह के नजदीकी लोगों और रिश्तेदारों के हरम में भेज दिया गया।”(हिस्ट्री एण्ड कल्चर ऑफ दी इण्डियन पीपुल : आर.सी. मजूमदार, भारतीय विद्या भवन, पृष्ठ ३१२)१६५७ में शाहजहाँ बीमार पड़ा और उसी के बेटे औरंगजेब ने उसे उसकी रखैल जहाँआरा के साथआगरा के किले में बंद कर दिया । परन्तु औरंगजेब मे एक आदर्श बेटे का भी फर्ज निभाया और अपने बापकी कामुकता को समझते हुए उसे अपने साथ ४० रखैलें (शाही वेश्याएँ) रखने की इजाजत दे दी। और दिल्ली आकर उसने बाप के हजारों रखैलों में से कुछ गिनी चुनी औरतों को अपने हरम में डालकर बाकी सभी को उसने किले से बाहर निकाल दिया।उन हजारों महिलाओं को भी दिल्ली के उसी हिस्से में पनाह मिली जिसे आज दिल्ली का रेड लाईट एरिया जीबी रोड कहा जाता है। जो उसके अब्बा शाहजहाँ की मेहरबानी से ही बसा और गुलजार हुआ था ।शाहजहाँ की मृत्यु आगरे के किले में ही २२ जनवरी १६६६ ईस्वी में ७४ साल की उम्र में द हिस्ट्री चैन शाहजहाँ की मृत्यु आगरे के किले में ही २२ जनवरी १६६६ ईस्वी में ७४ साल की उम्र में द हिस्ट्री चैनल के अनुसार अत्यधिक कमोत्तेजक दवाएँ खा लेने का कारण हुई थी। यानी जिन्दगी के आखिरी वक्त तक वो अय्याशी ही करता रहा था।अब आप खुद ही सोचें कि क्यों ऐसे बदचलन और दुश्चरित्र इंसान को प्यार की निशानी समझा कर महानबताया जाता है…… ?????क्या ऐसा बदचलन इंसान कभी किसी से प्यारकर सकता है….?????क्या ऐसे वहशी और क्रूर व्यक्ति की अय्याशी की कसमेंखाकर लोग अपने प्यार को बे-इज्जत नही करते हैं ??दरअसल ताजमहल और प्यार की कहानी इसीलिए गढ़ी गयी है कि लोगों को गुमराह किया जा सके और लोगों खासकर हिन्दुओं से छुपायी जा सके कि ताजमहल कोई प्यार की निशानी नहीं बल्कि महाराज जय सिंह द्वारा बनवाया गया भगवान् शिव का मंदिर””तेजो महालय”” है….!और जिसे प्रमाणित करने के लिए शंकराचार्य स्वरूपानंद जी आज भी कोर्ट में सत्य की लड़ाई लड़ रहे हैं।असलियत में मुगल इस देश में धर्मान्तरण, लूट-खसोट और अय्याशी ही करते रहे परन्तु नेहरू के आदेश पर हमारे इतिहासकारों नें इन्हें जबरदस्ती महान बनाया। और ये सब हुआ झूठी धर्मनिरपेक्षता के नामपर।

मार्शल आर्ट का इतिहास

*मार्शल आर्ट का इतिहास*
आज भारतीय जन अपनी संस्कृति और संभ्यता भूलने के दौर में जी रहा है या यूँ कहे कि भारतीयों ने अपनी संस्कृति और सभ्यता भुला ही दी तो कोई अतिश्योक्ति नही होगी l जिन संस्कृतियो और मूल्यों को हम भुला चुके या फिर नकार चुके, उन्ही को अपनाकर कई देश आज विकसित अवस्था में हमारे सामने खड़े है और हम कहाँ है आज ये बताने की आवश्यकता नही l
आज जिस मार्शल आर्ट की कला के दीवाने भारतीय है और वो इसे सीखने के लिए हमेशा उत्सुक रहते है उसके बारे में यही सोचते है कि ये चीन की देन है, जबकि हकीकत कुछ और ही है l दरअसल इस कला का ज्ञान चीन ने नही बल्कि चीन के साथ सम्पूर्ण विश्व को हमने दिया l परन्तु विडम्बना तो ये है कि इस अद्भुत विद्या के जनक का नाम ही भारतीयों को नही मालूम l ये सब मैकाले की शिक्षा नीति का ही प्रतिफल है |
आज जिसे चीन, जापान, थाईलैंड आदि देशों में जिसे भगवन की तरह पूजा जाता है ; वह हमारे देश के हैं और हम उनका नाम भी नहीं जानते हैं, इससे बड़ी शर्म की बात क्या हो सकती है |
आज आवश्यकता है हमें अपने गौरवमय इतिहास को जानने की, जो भी प्राचीन ग्रन्थ हैं उनका अध्ययन करने की, जो भी ज्ञान हमारे हमारे ऋषि – मुनियों ने हमें प्रदान किया हुआ है उस पर अमल करने की |
पश्चिम और दुनिया के अन्य देशों में मार्शल आर्ट को चर्चित करने का श्रेय काफी हद तक स्वर्गीय ब्रूस ली को दिया जाता है। बाद में 1960 और 1970 के दशक में मार्शल कलाकार और हॉलीवुड अभिनेता ब्रूस ली से प्रभावित मीडिया की दिलचस्पी मार्शल आर्ट के प्रति देखी गई । एशियाई और हॉलीवुड मार्शल आर्ट फिल्मोंको भी आंशिक रूप से इसका श्रेय दिया जाता हैं जहां जैकी चेन और ब्रूस ली जैसे प्रख्यात फिल्मी हस्तियों को हाल के वर्षों में चीनी मार्शल आर्ट को बढ़ावा देने के लिए जिम्मेदार माना जाता है।

मार्शल आर्ट में सबसे अच्छी विद्या मानी जाती है कुंग्फु और इसको सिखाने का सबसे अच्छा विद्यालय माना जाता है चीन में स्थित सओलिन मन्दिर | आपको यह जानकार बेहद आश्चर्य होगा की इस विद्यालय की आधारशिला रखने वाले और चीन को इस कला का ज्ञान देने वाले भारतीय थे | उस भारतीय का नाम था – ” बोधिधर्मन ” |
550 ई.पू. दक्षिण भारत के पल्लव वंश के राजकुमार, बोधिधर्मन (जिन्हे धरुमा नाम से भी पुकारा गया) नाम के भिक्षु बन गये। बोधिधर्मन आत्मरक्षा कला के अलावा एक महान चिकित्सक भी थे | उन्होंने अपने ग्रन्थ में डीएनए के माध्यम से बीमारियों को ठीक करने की विधि के बारे में भी आज से १६०० साल पहले बता दिया था | बोधिधर्मन के माध्यम से ही चीन, जापान और कोरिया में बौद्ध धर्म का विस्तार हुआ था। 520-526 ईश्वी में चीन जाकर उन्होंने चीन में ध्यान संप्रदाय की नींव रखी थी जिसे च्यान या झेन कहते हैं। ओशो रजनीश ने बोधिधर्मन के बारे में बहुत कुछ कहा है।
माना जाता है कि यह भिक्षु दक्षिण भारत के कांचीपुरम के राजा सुगंध के तीसरे पुत्र थे। बौद्ध धर्म के ज्ञान को भगवान बुद्ध ने महाकश्यप से कहा। महाकश्यप ने आनंद से और इस तरह यह ज्ञान चलकर आगे बोधिधर्मन तक आया। बोधिधर्मन उक्त ज्ञान व गुरु शिष्य परंपरा के अट्ठाइसवें गुरु थे।
उत्तरी चीन के तत्कालीन राजा बू-ति बोधिधर्मन से प्रभावित थे। बू-ति के निमन्त्रण पर बोधिधर्मन की उनसे नान-किंग में भेंट हुई। यहीं पर नौ वर्ष तक रहते हुए बोधिधर्मन ने ध्यान का प्रचार-प्रसार किया। माना जाता है कि बोधिधर्म जब तक चीन में रहे मौन ही रहे और मौन रहकर ही उन्होंने ध्यान-सम्प्रदाय की स्थापना कर ध्यान के रहस्य को बताया। बाद में उन्होंने कुछ योग्य व्यक्तियों को चुना और अपने मन से उनके मन को बिना कुछ बोले शिक्षित किया। इसे हम मानसिक संवाद कह सकते हैं | यही ध्यान-सम्प्रदाय कोरिया और जापान में जाकर विकसित हुआ।

बोधिधर्मन के प्रथम शिष्य और उत्तराधिकारी का नाम शैन-क्कंग था, जिसे शिष्य बनने के बाद उन्होंने हुई-के नाम दिया। पहले वह कन्फ्यूशस मत का अनुयायी था। बोधिधर्मन की कीर्ति सुनकर वह उनका शिष्य बनने के लिए आया था। बोधिधर्म का कोई ग्रंथ नहीं है, लेकिन ध्यान सम्प्रदाय की इतिहास पुस्तकों में उनके कुछ वचनों का उल्लेख मिलता है।
मार्शल आर्ट या लड़ाई की कलाएं विधिबद्ध अभ्यास की प्रणाली और बचाव के लिए प्रशिक्षण की परंपराएं हैं। सभी मार्शल आर्ट्स का एक समान उद्देश्य है : ख़ुद की या दूसरों की किसी शारीरिक ख़तरे से रक्षा. इसके अलावा कुछ मार्शल आर्ट को जहां आस्था जैसे हिंदू धर्म, बौद्ध धर्म, दाओवाद,कन्फ्यूशीवाद या शिन्टो से जोड़ा जाता है, वहीं दूसरी सम्मान के एक विशेष नियम का पालन करती हैं। मार्शल आर्ट को विज्ञान और कला दोनों माना जाता है। इनमें से कई कलाओं का प्रतिस्पर्धात्मक अभ्यास भी किया जाता है, ज़्यादातर लड़ाई के खेल में, लेकिन ये नृत्य का रूप भी ले सकती हैं।
मार्शल के गुण अनुशासन, विनम्रता, संयम और सम्मान इसी दर्शन शास्त्री की देन माने जाते हैं। दारुमा को चीन में ज़ैनबौद्धवाद के संस्थापक के रूप में भी जाना जाता है। इसीलिए नैतिक आचरण और आत्मानुशासन पुरातन काल से ही मार्शल अभ्यास का हिस्सा बन गये। इसी के साथ भारतीय ध्यान गुरू बुद्धभद्र (मैंडेरिन में इसे बाटुओ बुलाया जाता है) चीन के शाओलिन मंदिर के पहले महंत बने ! उत्तरी वी राजवंश के राजा झीआओवेन ने 477 ई. पू. शाओलिन मठ का निर्माण करवाया.आज भी केरल में मार्शल आर्ट के इस कौशल को इसके मूल स्वरुप में देखा जा सकता है |
इसी विषय पर कुछ समय पूर्व एक फिल्म भी आई थी आपने चेन्नई V / s चाईन

हमेशा ध्यान रखें

*यह हमेशा ध्यान रखे*

1) ������ *निम्बू-मिर्च* खाने के लिये है.. कही *टाँगने* के लिए नहीं है....

2) ���� *बिल्लियाँ* जंगली या पालतू जानवर है, बिल्ली के *रास्ता काटने* से कुछ गलत नहीं होता.. बल्कि चूहों से होनेवाले नुक्सान को बचाया जा सकता है.....
.
3) ���� *छींकना* एक नैसर्गिक क्रिया है , छींकने से कुछ *अनहोनी* नहीं होती ना हि किसी काम में बाधा आती है- छींकने से शरीर की *सुप्त पेशियां* सक्रीय हो जाती है...

4) ���� *भूत* पेड़ों पर नहीं रहते - पेड़ों पर *पक्षी*रहते है.....

5) ���� *चमत्कार* जैसी कोई चीज नहीं होती - हर घटना के पिछे *वैज्ञानिक* कारण होता है.....

6) ⛄☃ *भोपा, बाबा* जैसे लोग *झुठे* होते है- जिन्हें *शारारिक मेहनत* नहीं करनी ये वही लोग है.....

7) ⛈������ *जादू टोणा*, या *किसी ने कराया* ऐसा कुछ नहीं होता, ये दुर्बल लोगोंके *मानसिक विकार* है....
जादू-टोणा करके आपके ग्रहो की दिशा बदलने वाले बाबा, हवा और मेघों की दिशा बदलकर बारिश नहीं ला सकते...?⛈☁����

8 ) ���� *वास्तुशास्त्र* भ्रामक है. सिर्फ दिशाओ का *डर* दिखाकर लूट...
वास्तविक तो पृथ्वी ही खुद हर क्षण *अपनी दिशा* बदलती है....  अगर *कुबेर जी* उत्तर दिशा में है तो एक ही स्थान या दिशा में *अमीर* और *गरीब* दोनों क्यों पाये जाते है?..... .

9) ���������� *मन्नत,पूजा, बलि, टिप* या *चढ़ावे* से भगवान प्रसन्न होकर *फल* देते है, तो क्या भगवान् *रिश्वतखोर* है?.....    आध्यात्म *मोक्ष* के लिए है, *धन* कमाने के लिए नहीं.....

10) �� ये जो *पढ़* रहे हो इसका अनुकरण करे, और अपने *मित्रों* को भी send करे...

यह मेसैज 15 दूसरे ग्रूप्स में भेजने से कोई *खुशखबरी* नहीं मिलेगी...और इसको डिलीट करने पर कोई अनहोनी भी नहीं होगी। पर Farword करने से आपके कई मित्र *मेहनत*और *कर्म* का महत्त्व जरूर जान सकेंगे..

गद्दारो के लिए कविता

समाज के गद्दार नेताओं और उनके बिकाऊ संगठनों पर कटाक्ष और पोल खोलती हमारे मिशनरी कवि की यह कविता जरूर पढ़े और आत्मचिंतन करें।

चल यार मिशन चलाते है,
खर्चे हेतु 1 संस्था बनाते है...!!!
दो चार चेलो को पाले,
उनसे नारे लगवाते है....!!!
चल यार मिशन चलाते है........1
4 मैं जोडू और 4 तू जोड़,
अपनी संख्या बढ़ायेंगे...!!!
मैं अध्यक्ष तू महामन्त्री,
ये सबको बतलायेंगे,....!!!
चन्दा बटोर कम्पनी बन,
आधा-आधा माल खाते है...!!!
*चल यार मिशन चलाते है....2
विधायक जी के पास चले,
कुछ चन्दा हिस्से आयेगा...!!!
100-100 अगर मांगे हमने,
50 तो जरूर मिल जायेगा...!!!
वरना सुन 10 हजार का ,
1 मुख्य अतिथि बनाते है...!!!
*चल यार मिशन चलाते है....3
जितना लम्बा भाषन होगा,
उतना घर में राशन होगा...!!!
भीम मिशन की आड़ में,
फिर तो अपना शासन होगा...!!!
हम है कट्टर भीम सैनिक,
दुनिया को बतलाते है...!!!
*चल यार मिशन चलाते है....4
अमा एक काम करो मियां,
एक कार्यक्रम रखवायेंगे...!!!
मंच, माला के संग माइक,
स्वागत अपना करवाएंगे....!!!
एक दो गायक, कवि,
शायर को भी बुलवाते है....!!!
*चल यार मिशन चलाते है....5
अपनी संस्था सबसे ऊँची, गला फाड़-2 बतलायेंगे...!!!
भीम मिशन को गड्ढे भीतर,
निम्न द्वार लेकर जायेंगे...!!!
ऐसे कर्मो को करने वाले,
केवल नेता  कहलाते है....!!!
*चल यार मिशन चलाते है.....6
दो चार आंदोलन करके,
फ़ोटो 100 खिंचवाएंगे....!!!
व्हाट्सएप-सोशल मीडिया ,
खूब उन्हें हम फैलाएंगे...!!!
बड़ी पार्टियों से घूस को लेकर,आंदोलन को दबाते हैं...!!!
*चल यार मिशन चलाते है....7
चमचा बनकर किसी भगोने,
के अंदर हम घुस जाएंगे.....!!!
चरण में पड़कर बड़े नेता के,
मन्त्री पद भी पायेंगे.....!!!
मिशन का काम हुआ पूरा,
चल अब मौज उड़ाते है...!!!
*चल यार मिशन चलाते है.....8

शुक्रवार, 24 फ़रवरी 2017

१२ ज्योतिर्लिंग

12 ज्योतिर्लिंगों का महत्व व महिमा ��

1- सोमनाथ

सोमनाथ ज्योतिर्लिंग भारत का ही नहीं अपितु इस पृथ्वी का पहला ज्योतिर्लिंग माना जाता है। यह मंदिर गुजरात राज्य के सौराष्ट्र क्षेत्र में स्थित है। इस मंदिर के बारे में मान्यता है, कि जब चंद्रमा को दक्ष प्रजापति ने श्राप दिया था, तब चंद्रमा ने इसी स्थान पर तप कर इस श्राप से मुक्ति पाई थी। ऐसा भी कहा जाता है कि इस शिवलिंग की स्थापना स्वयं चन्द्र देव ने की थी। विदेशी आक्रमणों के कारण यह 17 बार नष्ट हो चुका है। हर बार यह बिगड़ता और बनता रहा है। 

2- मल्लिकार्जुन

यह ज्योतिर्लिंग आन्ध्र प्रदेश में कृष्णा नदी के तट पर श्रीशैल नाम के पर्वत पर स्थित है। इस मंदिर का महत्व भगवान शिव के कैलाश पर्वत के समान कहा गया है। अनेक धार्मिक शास्त्र इसके धार्मिक और पौराणिक महत्व की व्याख्या करते हैं। 

कहते हैं कि इस ज्योतिर्लिंग के दर्शन करने मात्र से ही व्यक्ति को उसके सभी पापों से मुक्ति मिलती है। एक पौराणिक कथा के अनुसार जहां पर यह ज्योतिर्लिंग है, उस पर्वत पर आकर शिव का पूजन करने से व्यक्ति को अश्वमेध यज्ञ के समान पुण्य फल प्राप्त होते हैं। 

3- महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग 

यह ज्योतिर्लिंग मध्य प्रदेश की धार्मिक राजधानी कही जाने वाली उज्जैन नगरी में स्थित है। महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग की विशेषता है कि ये एकमात्र दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग है। यहां प्रतिदिन सुबह की जाने वाली भस्मारती विश्व भर में प्रसिद्ध है। महाकालेश्वर की पूजा विशेष रूप से आयु वृद्धि और आयु पर आए हुए संकट को टालने के लिए की जाती है। उज्जैनवासी मानते हैं कि भगवान महाकालेश्वर ही उनके राजा हैं और वे ही उज्जैन की रक्षा कर रहे हैं।

4- ओंकारेश्वर

ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध शहर इंदौर के समीप स्थित है। जिस स्थान पर यह ज्योतिर्लिंग स्थित है, उस स्थान पर नर्मदा नदी बहती है और पहाड़ी के चारों ओर नदी बहने से यहां ऊं का आकार बनता है। ऊं शब्द की उत्पति ब्रह्मा के मुख से हुई है। इसलिए किसी भी धार्मिक शास्त्र या वेदों का पाठ ऊं के साथ ही किया जाता है। यह ज्योतिर्लिंग औंकार अर्थात ऊं का आकार लिए हुए है, इस कारण इसे ओंकारेश्वर नाम से जाना जाता है।

5- केदारनाथ

केदारनाथ स्थित ज्योतिर्लिंग भी भगवान शिव के 12 प्रमुख ज्योतिर्लिंगों में आता है। यह उत्तराखंड में स्थित है। बाबा केदारनाथ का मंदिर बद्रीनाथ के मार्ग में स्थित है। केदारनाथ समुद्र तल से 3584 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है। केदारनाथ का वर्णन स्कन्द पुराण एवं शिव पुराण में भी मिलता है। यह तीर्थ भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है। जिस प्रकार कैलाश का महत्व है उसी प्रकार का महत्व शिव जी ने केदार क्षेत्र को भी दिया है।

6- भीमाशंकर

भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग महाराष्ट्र के पूणे जिले में सह्याद्रि नामक पर्वत पर स्थित है। भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग को मोटेश्वर महादेव के नाम से भी जाना जाता है। इस मंदिर के विषय में मान्यता है कि जो भक्त श्रद्धा से इस मंदिर का दर्शन प्रतिदिन सुबह सूर्य निकलने के बाद करता है, उसके सात जन्मों के पाप दूर हो जाते हैं तथा उसके लिए स्वर्ग के मार्ग खुल जाते हैं।

7- काशी विश्वनाथ

विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है। यह उत्तर प्रदेश के काशी नामक स्थान पर स्थित है। काशी सभी धर्म स्थलों में सबसे अधिक महत्व रखती है। इसलिए सभी धर्म स्थलों में काशी का अत्यधिक महत्व कहा गया है। इस स्थान की मान्यता है कि प्रलय आने पर भी यह स्थान बना रहेगा। इसकी रक्षा के लिए भगवान शिव इस स्थान को अपने त्रिशूल पर धारण कर लेंगे और प्रलय के टल जाने पर काशी को उसके स्थान पर पुन: रख देंगे। 

8- त्र्यंबकेश्वर

यह ज्योतिर्लिंग गोदावरी नदी के करीब महाराष्ट्र राज्य के नासिक जिले में स्थित है। इस ज्योतिर्लिंग के सबसे अधिक निकट ब्रह्मागिरि नाम का पर्वत है। इसी पर्वत से गोदावरी नदी शुरू होती है। भगवान शिव का एक नाम त्र्यंबकेश्वर भी है। कहा जाता है कि भगवान शिव को गौतम ऋषि और गोदावरी नदी के आग्रह पर यहां ज्योतिर्लिंग रूप में रहना पड़ा। 

9- वैद्यनाथ 

श्री वैद्यनाथ शिवलिंग का समस्त ज्योतिर्लिंगों की गणना में नौवां स्थान बताया गया है। भगवान श्री वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग का मन्दिर जिस स्थान पर अवस्थित है, उसे वैद्यनाथ धाम कहा जाता है। यह स्थान झारखंड राज्य (पूर्व में बिहार ) के देवघर जिला में पड़ता है। 

10- नागेश्वर ज्योतिर्लिंग

यह ज्योतिर्लिंग गुजरात के बाहरी क्षेत्र में द्वारिका स्थान में स्थित है। धर्म शास्त्रों में भगवान शिव नागों के देवता है और नागेश्वर का पूर्ण अर्थ नागों का ईश्वर है। भगवान शिव का एक अन्य नाम नागेश्वर भी है। द्वारका पुरी से भी नागेश्वर ज्योतिर्लिंग की दूरी 17 मील की है। इस ज्योतिर्लिंग की महिमा में कहा गया है कि जो व्यक्ति पूर्ण श्रद्धा और विश्वास के साथ यहां दर्शन के लिए आता है उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती है।

11- रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग

यह ज्योतिर्लिंग तमिलनाडु राज्य के रामनाथपुरं नामक स्थान में स्थित है। भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक होने के साथ-साथ यह स्थान हिंदुओं के चार धामों में से एक भी है। इस ज्योतिर्लिंग के विषय में यह मान्यता है कि इसकी स्थापना स्वयं भगवान श्रीराम ने की थी। भगवान राम के द्वारा स्थापित होने के कारण ही इस ज्योतिर्लिंग को भगवान राम का नाम रामेश्वरम दिया गया है। 

12- धृष्णेश्वर मन्दिर

घृष्णेश्वर महादेव का प्रसिद्ध मंदिर महाराष्ट्र के औरंगाबाद शहर के समीप दौलताबाद के पास स्थित है। इसे घृसणेश्वर या घुश्मेश्वर के नाम से भी जाना जाता है। दूर-दूर से लोग यहां दर्शन के लिए आते हैं और आत्मिक शांति प्राप्त करते हैं। भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगोंb hv में से यह अंतिम ज्योतिर्लिंग है। बौद्ध भिक्षुओं द्वारा निर्मित एलोरा की प्रसिद्ध गुफाएं इस मंदिर के समीप स्थित हैं। यहीं पर श्री एकनाथजी गुरु व श्री जनार्दन महाराज की समाधि भी है।

मंगलवार, 7 फ़रवरी 2017

आरक्षण अन्य देशो में

RESERVATION IN OTHER COUNTRIES
दुनिया के निम्नलिखित देशो में मिलता है आरक्षण (Reservation/Affirmative Action):-
आजकल देश में दलित (OBC, SC & ST) आरक्षण के विरोध मे आंधी सी चल रही है। आरक्षण के खिलाफ बेहूदे और बेतुके तर्क किये जाते है। सबसे पहला तर्क होता है कि दूसरे देशो मे आरक्षण नहीं दिया जाता इसलिये वे देश हमसे ज्यादा प्रगितिशील है जो बिल्कुल गलत है। विदेशो मे भी आरक्षण की पद्धति है। अमेरिका, चीन, जापान जैसे देशों में भी आरक्षण है और इसे ईमानदारी से दिया जाता है।
बाहरी देशों में आरक्षण को Affirmative Action कहा जाता है। Affirmative Action का मतलब समाज के "वर्ण " तथा "नस्लभेद" के शिकार लोगो के लिये सामाजिक समता का प्रावधान है ।
1961 को संयुक्त राष्ट्र की बैठक मे सभी प्रकार के वर्ण, नस्लभेद व रंगभेद के खिलाफ कड़ा कानून बनाया गया। इसके तहत संयुक्त राष्ट्र में सम्मिलित सभी देशो ने अपने देश के शोषित वर्ग (दलित) की मदद करके उन्हें समाज की मुख्य धारा मे स्थापित करने का निर्णय लिया। इसी फैसले के तहत ही शोषितों और वंचितो को उठाने के लिए अलग अलग देशो ने अपने अपने तरीके से आरक्षण लागु किया है।
ऊपर कहे गए देश अमेरिका, जापान और भारत के अलावा अन्य देशो ने भी आरक्षण दिया है जिन मे से कुछेक निम्नलिखित हैं :-
1. हमारे पडोसी देश पाकिस्तान मे बडी मुश्किल से 5% दलित हैं लेकिन उन्हें ईमानदारी से 6% आरक्षण दिया जाता है।
2. आरक्षण के कारण दक्षिण अफ्रीका टीम में 6 अश्वेत खिलाडियों का चयन जरूरी होता है।
3. अमेरिका में affirmative action) के तहत अश्वेतों को आरक्षण मिला हुआ है। वहां की पिक्चरों में भी अश्वेत कलाकारों का आरक्षण निर्धारित है। वहाँ कोई पिक्चर या विभाग ऐसा नहीं मिलेगा जिसमें अश्वेत/काले न हो। अमेरिका ने तो आज से 155 साल पहले 4 मार्च, 1861 को (अब्राहम लिंकन) मोची जाति को अपना राष्ट्रपति बना दिया था। अमेरिका के निवर्तमान राष्ट्रपति बराक ओबामा भी एक अश्वेत, मुस्लिम और छोटे तबके के थे। तभी तो अमेरिका तरक्की की दुनिया में अन्य देशों से काफी आगे हैं। भारत में तो सम्पूर्ण हिस्सेदारी पर कुछे लोग कुंडली मारकर कब्जा जमा रखा है जबकि 50 प्रतिशत आरक्षण उन्ही 15 प्रतिशत लोगों को अप्रत्यक्ष रूप में मिल रहा है। इसीलिये वे समाज मे भ्रांति बनाये रखने के लिए आरक्षण/
हिस्सेदारी का आऐ दिन विरोध करते रहते हैं।
4. ब्राझील में आरक्षण Vestibular नाम से जाना जाता है ।
5. कनाडा में समान रोजगार का तत्व है जिसके तहत फायदा वहाँ के असामान्य तथा अल्पसंख्यकों को होता है ।
6. चीन में महिला और तात्विक अल्पसंख्यको के लिये आरक्षण है ।
7. फिनलैंड मे स्वीडीश लोगो के लिये आरक्षण है ।
8. जर्मनी में जिमनॅशियम सिस्टम है ।
9. इसरायल में Affirmative Action के तहत आरक्षण है ।
10. जापान जैसे सबसे प्रगतिशिल देश में भी बुराकूमिन लोगो के लिये आरक्षण है (बुराकूमिन जापान के हक वंचित दलित लोग हैं )
11. मॅसेडोनिया में अल्बानियन के लिये आरक्षण है ।
12. मलेशिया में भी उनकी नई आर्थिक योजना के तहत आरक्षण लागू हुआ है ।
13. न्यूजीलैंड में माओरिस और पॉलिनेशियन लोगो के लिये Affirmative Action का आरक्षण है ।
14. नॉर्वे के पीसीएल बोर्ड मे 40 % महिला आरक्षण हें।
15. रोमानिया मे शोषण के शिकार रोमन लोगों के लिये आरक्षण है ।
16. दक्षिण आफ्रिका मे रोजगार समता (काले गोरे लोगो को समान रोजगार) आरक्षण है ।
17. दक्षिण कोरिया मे उत्तरी कोरिया तथा चीनी लोगों के लिये आरक्षण है ।
18. श्रीलंका मे तमिल तथा क्रिश्चियन लोगो के लिये अलग नियम अर्थात आरक्षण है ।
19. स्वीडन मे General Affirmative Action के तहत आरक्षण मिलता है ।
अगर इतने सारे देशों में आरक्षण दिया जाता है (जिनमे कई विकसित देश भी शामिल है) तो फिर भारत का आरक्षण किस प्रकार भारत की प्रगति में बाधक है। भारत में तो लोग सबसे ज्यादा जातिभेद के ही शिकार हैं । भारतीय शुद्रो/दलितो को तो हजारों सालों से उनके मौलिक अधिकारों से ही वंचित कर गुलाम बना कर रखा। तो फिर भारतीय दलितो को आरक्षण क्यों न मिले?
जब तक भारत के सभी जाति धर्म के लोग शिक्षा, सेना, सभी प्रकार की नौकरी, संसाधन तथा सरकार में समान रुप से प्रतिनिधित्व नहीं करेंगे , तब तक देश वांछनीय प्रगति नहीं कर पाएगा। अगर सभी देश प्रगति के लिए सभी लोगों को साथ लेकर चल रहे हैं तो फिर भारत क्यों नहीं।

जय संविधान.....जय भारत।
गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।
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