बुधवार, 18 फ़रवरी 2015

गांधीजी

http://khabarkikhabar.com/archives/1237

भारत को एक लंबे संघर्ष और असीमित बलिदान के बाद 15 अगस्त-1947 को आज़ादी मिली. अभी आजादी का जशन पूरी तरह मनाया भी नही गया था के हमाराराष्ट्रपिता महात्मा गाँधी की हत्या 30 जनवरी 1948 को नाथूराम गोडसे ने गोली मार कर कर दि.इस तरह स्वतंत्र भारत का ए पहला आतंकवादी घटना था और नाथूराम गोडसे स्वतंत्र भारत का प्रथम आतंकवादी था.बहुत आश्चर्य होता है जब आज नाथु राम गोडसेको कुछ संप्रदायिक पार्टीयो द्वारा गोडसे को एक राष्ट्रीए हीरो बनाने की कोशिश चल रही है. इस आतंकवादीको पैदा करने वाला संगठन आर.एस . एस था. इस संगठन की बुनियाद 1925 मे विजयदशमी के दिन केशव हेडगोवार ने रखी जिस का मक़सद हिन्दुत्व के कॉन्सेप्ट को आयेज बडाना था. इस संगठन ने आजादी की लड़ाई मे कभी भी हिस्सा नही लिया बल्के बहुत से दस्तावेज़ से साबित होता है के संघ अंग्रेज़ो की चतुराई मे लगा रता था. संघ ने हमेशा भगवा झंडे को तरजीह दी कभी भी ए लोग राष्टिये झंडे को सल्यूटनही किया.सत्य- अहिंसा के सबसे बड़े प्रवर्तक महात्मा गाँधी की हत्या 30 जनवरी 1948 को कर दी गई थी, लेकिन उनकी हत्या की साजिश रचने वालों ने इससे कुछ दिन पहले भी 20 जनवरी को एक प्रार्थना सभा में बापू को मारने का प्रयास किया था हालाँकि वे इसमें असफल रहे।बहरहाल, अगर 20 जनवरी के हादसे को गंभीरता से लिया गया होता तो शयेद बापू बच गयेहोते.गाँधी जी के हत्या का कारण पाकिस्तान को 55 करोड़ रुपये देने के लिये सरकार को बाध्य करना और उन का मुस्लिमो के प्रति प्रेम बताया जाता है.लेकिन गन्ही जी के पौत्र तुषार गाँधी बापू की हत्या का यी करण नही मानते, उन्हो ने अपनी पुस्तक ‘ लेट्स किल गाँधी” मे लिखा हैके गाँधी जी की हत्या पूर्वनियोजित थी और ब्राह्मण का एक समुदाय जो हिन्दू राष्ट्र बनाना चाहता था, उसी ने हत्या करवाया क्योके वे गाँधी जी को अपने राह मे रोड़ा समझती थी.Why Godse killed Gandhi पुस्तक मे व. टी. राजशेखर लिखते है के गाँधी जी की हत्या के बारे मे संघ को पहलेसे ही मालूम था, जैसे ही हत्या की खबर मिली मिन्टो मे ही पूरे भारत मे मिठाये संघ के द्वारा बांटी गयी. जिस से लोग नाराज़ हो कर महाराष्ट्रऔर कर्नाटक मे लोगो ने बहुत से ब्राह्मणो के घर मे आग लगादी.गाँधी जी हत्या का समय गोवालकर मद्रास मे ब्राह्मणो के एक सभा मे उपस्थित थे, उस के बाद वे नागपुर वापस आ गये, मगर 1 फरवरी 1948 को रात्रि मे उन्हे गाँधी जी की हत्या मे शामिल होने पे गिरफ्तार कर लिया गया. 4 फरवरी को संघ पर पूरे देश मे प्रतिबंध लगा दिया गया. गृह मंत्री सरदार पटेल 18 जुलाइ-1948 के एक पत्र मे श्यामा प्रसाद मुखर्जी को लिखा के हमारे रिपोर्ट के अनुसार संघ और हिन्दू महासभा खासतौर से संघने देश मे घ्रणा का ऐसा माहौलबनाया जिस के करण गाँधी जी कीहत्या हो गयी. 11 सितंबेर 1948 को एक और पत्र मे पटेल ने लिखा के जिस तरह गाँधी जी के हत्या के बाद संघ वालो ने खुशी जाहिर की और मिठायी बांटी जिस के करण लोगो मे नाराजगी बड गयी, इसी कारण संघपर प्रतिबंध लगाना पड़ा.अब हम आप को गाँधी जी की हत्या के पीछे का एक और सच बताने जा रहा हु जो के संघ की साम्प्रदायिकता जेहनीयात मेपैदा हुआ था, क्यो के गाँधी जी की हत्या पूर्वनियोजित थीइस लिये नाथूराम गोडसे का बंगलोर के एक हॉस्पिटल मे खतना -(Circumcision कराया गया ताके मारने वाला मुसलमानप्रतीत हो सके, जिस के कारण जब ए खबर फैले गी तो मुसलमानोका क़त्लेआम शुरु हो जाये गा, मगर किस्मत का खेल देखिये के जैसे ही गाँधी जी को नाथूराम गोडसे ने गोली मारी वहा पे एक मौजूद आदमी ने कहा के ए नाथु तुम ने ए क्या कर दिया?. हत्या के कुछ देर बाद प्रधानमंत्री जवाहर लल नेहरू ऑल इंडिया रेडियो पे आये और उन्हो ने एलान किया के‘ बहुत अफसोस के साथ कहना पड रहा है के आज एक पागल हिन्दू ने गाँधी जी की हत्या कर दी.अब आप स्वंय देखे के आजादी केपहले और बाद मे संघ ने सिर्फ देश के खिलाफ ही काम किया है, और उन के बहुत से सदस्यो ने भी राष्ट्र के लिये काम नही किया है. इसे दुर्भाग्यपूर्णही काहे गे के संघ के सदस्य अटल बिहारी बाजपायी जो के अंग्रेज़ो से लिखित माफी भी मांग चुके है और वो पत्र आउटलुक मे भी प्रकाशित हो चुका है भारत के प्रधानमंत्री बी बन चुके है. इस लिये हम कह सकते है के नाथु रम गोडसे स्वतंत्र भारतका पहला आतंकवादी था और संघ आतंकवाद पैदा करने वाला प्रथम संगठन था.

मंगलवार, 17 फ़रवरी 2015

डॉ.भीमराव अम्बेडकर

सिंधराज परमारजय भिम जय मूलनिवासी साथियोअगर तुम एक सच्चे अंम्बेडकरवादी हो तो ईसे पुरा पढे एवं ज्यादा से ज्यादा सेयर करे !डॉ.भीमराव अम्बेडकर के बारे में ऐसे तथ्यजो छिपे हुएहै________________________________________(प्रो.एवं इतिहासकार श्रीमान TararamGautam सेमिली जानकारी का हिन्दी अनुवाद)कृपया अपना कीमती समय निकालकर डॉ. भीमरावअम्बेडकर बारे मेंछिपी बेशकीमती वास्तविकता को जानने का श्रमकरें....अम्बेडकर के महान कार्य :-एक भारतीय युवा के रूप में डॉ.भीमराव अम्बेडकरकी अधिकांश जानकारियों को साझा करते हुएख़ुशी और गर्व महसूस होता है |हमारे "आधुनिक भारत के संस्थापक और पिता" केबारेमें अज्ञात तथ्य -क्रांतिकारी डॉ .बाबासाहेब अम्बेडकर :-आप सभी से मेरा विनम्र अनुरोध है की इसे पढ़ने केबाद आगे से आगे साझा (share) करे-1 . कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय इंग्लैंड2011(विश्वका शीर्ष विश्वविद्यालय) के अनुसारदुनिया का पहला प्रतिभाशाली केवल एक भारतीयव्यक्ति डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर है, जो इसविश्वविद्यालय में सबसे शीर्ष स्थान पर रहा.2 . प्रतिष्ठित नोबेल पुरस्कार पाने वाले 6वेभारतीयअर्थशास्त्री प्रो. अमर्त्य सेन का दावा हैकि डॉ.बी. आर. अम्बेडकर अर्थशास्त्र में मेरे पिता है".3. भारत के प्रथम विधि/कानूनमंत्री बाबा साहेबडॉ. अम्बेडकर द्वारा भारतीय महिलाओं केउत्थानके लिए बनाया गया "हिंदू कोड बिल'' जबप्रधानमंत्री नेहरू द्वारा पारित न हो सका तबबाबा साहब अम्बेडकर ने पद से इस्तीफा देदिया |लेकिन यह दुर्भाग्य की बात रही महिलाओं का एकभी संगठन इसके लिए आगे आकर बात नहीं करसका |भारत में महिलाओं के सशक्तिकरण के लिएबाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर ने इसके लिए बहुतप्रयासकिया | तीन साल तक उन्होंने इस बिल को पारितकरवाने के लिए लड़ाई लड़ी, उन्होंने कहा की यहबिलभारतीय महिलाओं को गरिमा वापस दे रहा है ; औरलड़कों और लड़कियों को समान अधिकार देनेकी बात करता है |मगर श्यामा प्रसाद मुखर्जी केनेतृत्व में सत्तारूढ़ पार्टी में कट्टरपंथियों ने इसबिलपारित होने की अनुमति नहीं दी |4- 1935 में गठित भारतीय रिजर्व बैंक(आर.बी.आई)का आधार बाबा साहेब डॉ. बी.आर. अम्बेडकरद्वारा हिल्टन यंग कमीशन के समक्ष प्रस्तुतकिये गएविचारों के आधार पर किया गया था |5 . डॉ. अम्बेडकर दामोदर घाटी परियोजना ,हीराकुंड परियोजना , सूरजकुंड नदी-घाटी परियोजना के निर्माता थे | डा. अम्बेडकरकी अध्यक्षता में 1945 में इसे बहुउद्देशीयउपयोग केलिए महानदी के रूप में नियंत्रित कर के संभावितलाभ में निवेश करने का फैसला किया गया था,लेकिन अधिकांश नेतागण छिपे हुए थे और गलततरीकेसे बहुउद्देश्यीय नदी-घाटी परियोजनाओं केमाध्यमसे औद्योगीकरण के लिए नेहरू की गलतनीतियों का समर्थन करने के लिए उन्हें पूरी तरह सेजिम्मेदार ठहराया |6 . डा. अम्बेडकर ने अति-महत्वपूर्णआवश्यकताओं केरूप में "ग्रिड सिस्टम" पर बल दिया जो आजभी सफलतापूर्वक काम कर रहा है | आजबिजली इंजीनियर जो प्रशिक्षण के लिए विदेशजा रहे हैं, इनका श्रेय भी डॉ. अंबेडकरको ही जाता है, जिन्होंने श्रम विभाग के एकनेता के रूप में विदेशों में प्रशिक्षित सबसे अच्छेइंजीनियरों के लिए नीति तैयार की है |7 . मजदूरों के मुक्तिदाता- डॉ. अम्बेडकर नेभारत मेंमजदूरों के लिए 8 घंटों का कार्य निर्धारण करश्रमिकों के लिए एक प्रकाशपुंज बन गये, 1942से पूर्वसे 12 घंटे के रूप में चला आ रहा समय बदल कर 8घंटे करदिया गया |8. डॉ. अम्बेडकर ने बिजली उत्पादन और थर्मलपावरस्टेशन की जांच पड़ताल की समस्या का विश्लेषणकरने, बिजली प्रणाली के विकास, जलविद्युतस्टेशन,साइटों, हाइड्रो इलेक्ट्रिक सर्वे के लिए केन्द्रीयतकनीकी विद्युत बोर्ड (CTPB)की स्थापना की.9. डॉ. अम्बेडकर ने मार्च 1944 केन्द्रीय जलसिंचाईऔर नेविगेशन आयोग (CWINC)की स्थापना की.हमारे घर आज रौशनी से प्रदीप्त और हमारेखेतों मेंहरियाली के रूप में फसले लहलहाती नजर आ रही हैतो इसकी वजह डॉ. अम्बेडकर की सुनियोजित वतारकीय परियोजनाओं के रूप में भूमिका रही है |आज भारत की अर्थव्यवस्था का एकबड़ा हिस्सा इसी पर टिका हुआ है |10-इस तरह भारत में जल प्रबंधन और विकासके रूप मेंएक ऐसी अवधारणा है , तो इसका श्रेय डा.अंबेडकरकी चतुरता को जाता है, जिसने अपनी चतुरता सेप्राकृतिक संसाधनों के लिए भारत की सेवा रही हैं |11- यह बाबा साहब डॉ. अम्बेडकरही दूरदृष्टि थी वरन आज भारत मेंबिजली की आपूर्ति से सिंचाई और अन्य विकासकार्यो से देश की इसस्थिति की कल्पना भी नहीं कर सकते |12- जब द्वितीय विश्व युद्ध समाप्तहो गया तबकृषि, उद्योगों के विकास, पुनर्वास औररक्षा सेवाओं की तैनाती में सुधार सहितअर्थव्यवस्था में फिर से सुधार करने के रूप मेंभारतको कई चुनौतियों का सामना करना था |को कई चुनौतियों का सामना करना था |ऐसी विकट स्थिति में पुनर्निर्माणसमिति (आरसीसी) का गठन किया और और डॉ.अम्बेडकर को ही इस समिति के अध्यक्षकी भूमिका सौंपी गई |13 डॉ. अम्बेडकर उत्तरी और दक्षिणी राज्यों मेंमध्यप्रदेश के विभाजन का सुझाव दिया था.उन्होंने यह भी कहा कि बिहार के विभाजन से इनदोनों राज्यों के लिए बेहतर विकास होगा | 1955सेराजधानियों के रूप में पटना और रांची दो भागों मेंविभाजित का सुझाव दिया था |मगर लगभग 45 साल के बाद वर्ष 2000 मेंदोनों राज्यों विभाजित किया गया और छत्तीसगढ़और झारखंड का गठन किया गया.14. डॉ. अम्बेडकर ही "भारत में महिलाओं केअधिकारों के चैंपियन" है |उन्होंने भारतीय महिलाओं की मुक्ति औरसशक्तिकरण के लिए लम्बे समय तक कठिनसंघर्षकिया और मजदूरों के लिए और भी कई कानून बनायेगये. जैसे:-*श्रम कल्याण निधि* महंगाई भत्ते* ई.एस.आई.* भविष्य निधि अधिनियम* महिला और बाल श्रम संरक्षण अधिनियम(महिलाओं के श्रम बिल के लिए)* मातृत्व लाभ* तलाक अधिनियम* संपत्ति के अधिकार* दिहाड़ी-श्रमिकोंको अवकाश लाभ .*कर्मचारियों के लिए वेतनमान में संशोधन.*खानों में भूमिगत कामकाजी महिलाओं पर प्रतिबंधव पुनरुद्धार.15. डॉ. अम्बेडकर ने भारत में रोजगारकार्यालय'की स्थापना सहित कई श्रम सुधारों के बारे में लानेमेंमहत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी..16 . डॉ. अम्बेडकर के अलावा अन्य कोईव्यक्ति नहीं था, जिसने संविधान में हर पांच सालमेंएक वित्त आयोग के लिए प्रावधान शुरू किया हो |17 . भारत के सभी तेरह वित्त आयोग की रिपोर्टकेलिए संदर्भ का मूल स्रोत सदा ही डॉ. अम्बेडकरकी पी.एच.डी. के थीसिस- " भारत में अंग्रेजों केप्रांतीय वित्त विकास" आधार रहा है |18 . डॉ. अम्बेडकर ही सम्पूर्ण दक्षिणएशिया मेंअर्थशास्त्र में पहले पी.एच.डी. औरअर्थशास्त्र में डबलडॉक्टरेट करने वाले पहले महापुरुष है |19 . डा. अम्बेडकर* भारत के पहले कानून मंत्री .* मात्र एक भारतीय जिसकी तस्वीर लंदन केसंग्रहालय में "कार्ल मार्क्स" के साथ है .* भारतीय संविधान के मुख्य वास्तुकार .* भारत के सबसे बड़े एवं प्रतिभाशाली वकील .* पहले आदमी जिन्होंने इंदिरा गांधी की "चालाकऔर मौसमी राजनेतागिरी" के बारे में खुले तौर परविरोध किया हो |* भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के दुश्मन और मुख्यप्रतिद्वंदी |* सार्वजनिक रूप में हिन्दू धर्म का "अमानवीय वबेवकूफ-पुराण "मनुस्मृति" नामक पुस्तक को जलानेवाले पहले महापुरुष |* भारतीय मूल बौद्ध धम्म क्रांति के नायक औरभारतमें धार्मिक पुनर्जागरणवादी नेता |* लाखों पीड़ितों के पिता.* राष्ट्रीय प्रतीक के रूप में अपनाया गया अशोकस्तम्भ जो शेर के रूप मेंजाना जाता है,तथा भारतीयराष्ट्रीय ध्वज में धम्म का पहिया (चक्र),जो दोनों सारनाथ में एक अशोक स्तंभ के रूप है,इनका श्रेय भी अम्बेडकर को ही दिया जाता है |* पहले भारतीय जो अर्थशास्त्र में एस.सी.स्नातककी उपाधि प्राप्त है.* डॉ. अम्बेडकर को सी.एन.एन., आई.बी.एन.,हिस्टरी टीवी., एवं चैनल18 द्वारा "सबसे महानभारतीय" के रूप में घोषित किया गया है |* 1908 में भारत में दलित वर्ग से 10वीं मैट्रिकपरीक्षा उत्तीर्ण करने वाले प्रथम व्यक्ति है,गौरतलबहै की भारत ही नहीं अपितु सम्पूर्ण विश्व में उसज़माने के सबसे प्रतिभाशाली विद्यार्थी को 750मेंसे सिर्फ 282 अंक मिले |क्या यहजातिवादी घटिया मानसिकता नहीं कही जा सकती है ?* 1912 में बी.ए. राजनीति और अर्थशास्त्रबंबईविश्वविद्यालय |* 1915 में अमेरिका से एम. ए. अर्थशास्त्र मेंअपने शोध"प्राचीन भारतीय वाणिज्य" में |* पीएचडी (ब्रिटिश भारत में प्रांतीय वित्तविकासअर्थशास्त्र ) 1917 मेंकोलंबिया विश्वविद्यालय ,अमेरिका में -* DSC - ( थीसिस - रुपया की समस्या )1920 मेंलंदन स्कूल ऑफ इकॉनॉमिक्स |* लंदन में 1924 में ग्रेज से कानून में बार .* LLD - ( ऑनर्स )कोलंबिया विश्वविद्यालय ,न्यूयॉर्क ,अपनी उपलब्धियों , नेतृत्व और संलेखन ( भारतका संविधान का )के लिए |* डी. लिट - उस्मानिया विश्वविद्यालयद्वारा सम्मानित भी.* एम.एस.सी. लंदन* राजनीतिक-अर्थशास्त्र जर्मनी .* अर्थशास्त्र में पहला पी.एच.डी. महामानवऔरअर्थशास्त्र में प्रथम डबल डॉक्टरेट भी |महानतम डॉ. भीमराव अम्बेडकर* संवैधानिज्ञ* क्रांतिकारी* बोधिसत्व* एक सांसद* अर्थशास्त्री* समाजशास्त्री* महान राजनीतिज्ञ* भारतीय विधिवेत्ता* बौद्ध कार्यकर्ता* दार्शनिक* विचारक* मानवविज्ञानी* इतिहासकार* वक्ता* विपुल लेखक*आधुनिक भारत के महानतम समाज सुधारक औरसच्चेमहानायक,लेकिन "भारतीय जातिवादी-मानसिकता" सेसदा ही इस महापुरुष की उपेक्षा ही की गई |बड़े ही दुर्भाग्य की बात रही है की भारत मेंहमेशा सेही एक विशेष व उच्च वर्ग के नेता और उनकेकार्यों को स्कूल-कालेजों की बहुत सी किताबें मेंऔर अन्य माध्यम से पढाया जाता है,एक युवा सामाजिक कायँकर सिंधराज परमार ,,whatsapp 9913439848

साधू

एक साधु 50 साल से एक ही जगह बैठकर रोज हनुमान चालीसा पढता था.एक दिन आकाशवाणी हुई और आवाज आई "हे साधु! तु 50 साल से हनुमान जी की स्तुति कर रहा है, लेकिन तेरी एक भी स्तुति स्वीकार नही हुई"साधु के साथ बैठने वाले दुसरे बंदो को भी दु:ख हुआ कि,यह बाबा 50 साल से हनुमानजी की स्तुति कर रहे है औरइनकी एक भी स्तुति स्वीकार नही हुई. यह कैसा न्याय.?लेकिन साधु दु:खी होने के बजाय खुशी से नाचने लगा. दुसरे लोगो ने साधु को देखकर आश्चर्य हुआ.एक बंदा साधु से बोला : बाबा, आपको तो दु:ख होना चाहिए कि आपकी 50 साल कि प्रार्थना बेकार गई.!साधु ने जवाब दिया : " मेरी 50 साल की प्रार्थना भले ही स्वीकार ना हुई तो क्या हुआ...!!! लेकिन भगवान को तो पता है ना कि मैँ 50 साल से प्रार्थना कर रहा हु"इसिलिए दोस्तो जब आप मेहनत करते हो और फल ना मिले तो निराश मत होना,क्युकिँ भगवान को तो पता है ही कि आप मेहनत कर रहे है, इसिलिए फल तो जरुर देगा

गुरुवार, 12 फ़रवरी 2015

कल्चर

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अपनी भारत की संस्कृति
को पहचाने.
ज्यादा से ज्यादा
लोगो तक पहुचाये.
यही है हमारी
संस्कृति की पहचान है ( अपने बच्चों को सिखाए  )

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************

( ०१ )    दो पक्ष-

कृष्ण पक्ष ,
शुक्ल पक्ष !

( ०२ )    तीन ऋण -

देव ऋण ,
पितृ ऋण ,
ऋषि ऋण !

( ०३ )    चार युग -

सतयुग ,
त्रेतायुग ,
द्वापरयुग ,
कलियुग !

( ०४ )    चार धाम -

द्वारिका ,
बद्रीनाथ ,
जगन्नाथ पुरी ,
रामेश्वरम धाम !

( ०५ )   चारपीठ -

शारदा पीठ ( द्वारिका )
ज्योतिष पीठ ( जोशीमठ बद्रिधाम )
गोवर्धन पीठ ( जगन्नाथपुरी ) ,
शृंगेरीपीठ !

( ०६ )   चार वेद-

ऋग्वेद ,
अथर्वेद ,
यजुर्वेद ,
सामवेद !

( ०७ )   चार आश्रम -

ब्रह्मचर्य ,
गृहस्थ ,
वानप्रस्थ ,
संन्यास !

( ०८ )   चार अंतःकरण -

मन ,
बुद्धि ,
चित्त ,
अहंकार !

( ०९ )   पञ्च गव्य -

गाय का घी ,
दूध ,
दही ,
गोमूत्र ,
गोबर !

( १० )   पञ्च देव -

गणेश ,
विष्णु ,
शिव ,
देवी ,
सूर्य !

( ११ )   पंच तत्त्व -

पृथ्वी ,
जल ,
अग्नि ,
वायु ,
आकाश !

( १२ )   छह दर्शन -

वैशेषिक ,
न्याय ,
सांख्य ,
योग ,
पूर्व मिसांसा ,
दक्षिण मिसांसा !

( १३ )   सप्त ऋषि -

विश्वामित्र ,
जमदाग्नि ,
भरद्वाज ,
गौतम ,
अत्री ,
वशिष्ठ और कश्यप!

( १४ )   सप्त पुरी -

अयोध्या पुरी ,
मथुरा पुरी ,
माया पुरी ( हरिद्वार ) ,
काशी ,
कांची
( शिन कांची - विष्णु कांची ) ,
अवंतिका और
द्वारिका पुरी !

( १५ )   आठ योग -

यम ,
नियम ,
आसन ,
प्राणायाम ,
प्रत्याहार ,
धारणा ,
ध्यान एवं
समािध !

( १६ )   आठ लक्ष्मी -

आग्घ ,
विद्या ,
सौभाग्य ,
अमृत ,
काम ,
सत्य ,
भोग ,एवं
योग लक्ष्मी !

( १७ )   नव दुर्गा --

शैल पुत्री ,
ब्रह्मचारिणी ,
चंद्रघंटा ,
कुष्मांडा ,
स्कंदमाता ,
कात्यायिनी ,
कालरात्रि ,
महागौरी एवं
सिद्धिदात्री !

( १८ )   दस दिशाएं -

पूर्व ,
पश्चिम ,
उत्तर ,
दक्षिण ,
ईशान ,
नैऋत्य ,
वायव्य ,
अग्नि
आकाश एवं
पाताल !

( १९ )   मुख्य ११ अवतार -

मत्स्य ,
कच्छप ,
वराह ,
नरसिंह ,
वामन ,
परशुराम ,
श्री राम ,
कृष्ण ,
बलराम ,
बुद्ध ,
एवं कल्कि !

( २० )   बारह मास -

चैत्र ,
वैशाख ,
ज्येष्ठ ,
अषाढ ,
श्रावण ,
भाद्रपद ,
अश्विन ,
कार्तिक ,
मार्गशीर्ष ,
पौष ,
माघ ,
फागुन !

( २१ )   बारह राशी -

मेष ,
वृषभ ,
मिथुन ,
कर्क ,
सिंह ,
कन्या ,
तुला ,
वृश्चिक ,
धनु ,
मकर ,
कुंभ ,
कन्या !

( २२ )   बारह ज्योतिर्लिंग -

सोमनाथ ,
मल्लिकार्जुन ,
महाकाल ,
ओमकारेश्वर ,
बैजनाथ ,
रामेश्वरम ,
विश्वनाथ ,
त्र्यंबकेश्वर ,
केदारनाथ ,
घुष्नेश्वर ,
भीमाशंकर ,
नागेश्वर !

( २३ )   पंद्रह तिथियाँ -

प्रतिपदा ,
द्वितीय ,
तृतीय ,
चतुर्थी ,
पंचमी ,
षष्ठी ,
सप्तमी ,
अष्टमी ,
नवमी ,
दशमी ,
एकादशी ,
द्वादशी ,
त्रयोदशी ,
चतुर्दशी ,
पूर्णिमा ,
अमावास्या !

( २४ )   स्मृतियां -

मनु ,
विष्णु ,
अत्री ,
हारीत ,
याज्ञवल्क्य ,
उशना ,
अंगीरा ,
यम ,
आपस्तम्ब ,
सर्वत ,
कात्यायन ,
ब्रहस्पति ,
पराशर ,
व्यास ,
शांख्य ,
लिखित ,
दक्ष ,
शातातप ,
वशिष्ठ !

        ।। ॐ शाति ऊँ ।।
"............."माँ"............."

माँ- दुःख में सुख का एहसास है,
माँ - हरपल मेरे आस पास है ।
माँ- घर की आत्मा है,
माँ- साक्षात् परमात्मा है ।
माँ- आरती है,
माँ- गीता है ।
माँ- ठण्ड में गुनगुनी धूप है,
माँ- उस रब का ही एक रूप है ।
माँ- तपती धूप में साया है,
माँ- आदि शक्ति महामाया है ।
माँ- जीवन में प्रकाश है,
माँ- निराशा में आस है ।
माँ- महीनों में सावन है,
माँ- गंगा सी पावन है ।
माँ- वृक्षों में पीपल है,
माँ- फलों में श्रीफल है ।
माँ- देवियों में गायत्री है,
माँ- मनुज देह में सावित्री है ।
माँ- ईश् वंदना का गायन है,
माँ- चलती फिरती रामायन है ।
माँ- रत्नों की माला है,
माँ- अँधेरे में उजाला है,
माँ- बंदन और रोली है,
माँ- रक्षासूत्र की मौली है ।
माँ- ममता का प्याला है,
माँ- शीत में दुशाला है ।
माँ- गुड सी मीठी बोली है,
माँ- दिवाली, होली है ।
माँ- इस जहाँ में हमें लाई है,
माँ- की याद हमें अति की आई है ।
माँ- मेरी देवी और दुर्गा माई है,
माँ- ब्रह्माण्ड के कण कण में समाई है ।
माँ- ब्रह्माण्ड के कण कण में समाई है ।h

"अंत में मैं बस ये इक पुण्य का काम करता हूँ,
दुनिया की सभी माँओं को दंडवत प्रणाम करता हूँ ।

: Qus→ जीवन का उद्देश्य क्या है?
Ans→ जीवन का उद्देश्य उसी चेतना को जानना है जो जन्म और मरण के बन्धन से मुक्त है। उसे जानना ही मोक्ष है।

Qus→ जन्म और मरण के बन्धन से मुक्त कौन है?
Ans→ जिसने स्वयं को, उस आत्मा को जान लिया वह जन्म और मरण के बन्धन से मुक्त है।

Qus→संसार में दुःख क्यों है?
Ans→लालच, स्वार्थ, भय संसार के दुःख का कारण हैं।

Qus→ ईश्वर ने दुःख
की रचना क्यों की?
Ans→ ईश्वर ने संसार
की रचना की और मनुष्य ने
अपने विचार और कर्मों से दुःख और सुख की रचना की।

Qus→ क्या ईश्वर है? कौन है वह? क्या रुप है उसका? क्या वह स्त्री है या पुरुष?
Ans→ कारण के बिना कार्य नहीं। यह संसार उस कारण के अस्तित्व का प्रमाण है। तुम हो इसलिए वह भी है उस महान कारण को ही आध्यात्म में ईश्वर कहा गया है। वह न स्त्री है न पुरुष।

Qus→ भाग्य क्या है?
Ans→हर क्रिया, हर कार्य का एक परिणाम है। परिणाम अच्छा भी हो सकता है, बुरा भी हो सकता है। यह परिणाम ही भाग्य है। आज का प्रयत्न कल का भाग्य है।

Qus→ इस जगत में सबसे बड़ा आश्चर्य क्या है?
Ans→ रोज़ हजारों-लाखों लोग मरते हैं फिर भी सभी को अनंतकाल तक जीते रहने की इच्छा होती है. इससे बड़ा आश्चर्य और क्या हो सकता है?

Qus→किस को गंवाकर चीज मनुष्य
धनी बनता है?
Ans→ लोभ

्Qus→ कौन सा एकमात्र उपाय है जिससे जीवन सुखी हो जाता है?
Ans → अच्छा स्वभाव ही सुखी होने का उपाय है.
H
Qus → किस चीज़ के खो जाने पर दुःख
नहीं होता
Ans → क्रोध
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गौतम बुध्द

संन्यास लेने के बाद गौतम बुद्ध ने अनेकक्षेत्रों की यात्रा की। एक बार वह एक गांव में गए। वहां एकस्त्री उनके पास आई और बोली- आप तो कोई राजकुमारलगते हैं। क्या मैं जान सकती हूं कि इस युवावस्था मेंगेरुआवस्त्र पहनने का क्या कारण है? बुद्ध ने विनम्रतापूर्वक उत्तरदिया कि तीन प्रश्नों के हल ढूंढने के लिए उन्होंने संन्यासलिया। यह शरीर जो युवा व आकर्षक है, पर जल्दी ही यहवृद्ध होगा, फिर बीमार व अंत में मृत्यु के मुंह में चला जाएगा।मुझे वृद्धावस्था, बीमारी व मृत्यु के कारण का ज्ञानप्राप्त करना है। उनसे प्रभावित होकर उस स्त्री ने उन्हेंभोजन के लिए आमंत्रित किया। शीघ्र ही यह बात पूरे गांवमें फैल गई। गांववासी बुद्ध के पास आए व आग्रह किया कि वेइस स्त्री के घर भोजन करने न जाएं क्योंकि वह चरित्रहीन है।बुद्ध ने गांव के मुखिया से पूछा- क्या आप भी मानते हैं कि वहस्त्री चरित्रहीन है?मुखिया ने कहा कि मैं शपथ लेकरकहता हूं कि वह बुरे चरित्र वाली है। आप उसके घर न जाएं। बुद्धने मुखिया का दायां हाथ पकड़ा और उसे ताली बजानेको कहा। मुखिया ने कहा- मैं एक हाथ सेताली नहीं बजा सकता क्योंकि मेरा दूसरा हाथ आपनेपकड़ा हुआ है।बुद्ध बोले- इसी प्रकार यह स्वयं चरित्रहीन कैसे हो सकती हैजब तक इस गांव के पुरुष चरित्रहीन न हों। अगर गांव केसभी पुरुष अच्छे होते तो यह औरत ऐसी न होती इसलिए इसकेचरित्र के लिए यहां के पुरुष जिम्मेदार हैं। यह सुनकरसभी लज्जित हो गए।बुद्धम् सरणं गच्छामि। धम्मम् सरणंगच्छामि। संघम् सरणं गच्छामि।