कठिन नहीं है शुद्ध हिन्दी - 44
० ० ०
इस भाग में हम 'के भीतर', 'के अन्दर', 'के ऊपर', 'हे', 'रे', 'अरे' आदि के प्रयोग पर बात करेंगे।
'के भीतर' या 'के अन्दर' का प्रयोग तब होता है, जब कर्ता (सब्जेक्ट) पहले से उपस्थित न रहे और कथन के समय क्रियाशील (सक्रिय) रहे, जैसे 'वह घर के अन्दर चला गया'। 'में' का प्रयोग करना यहाँ ठीक नहीं रहेगा। 'वह घर में है' में पहले से उपस्थित होने का अर्थ मिलता है। अंग्रेज़ी की बात करें, तो 'में' के लिए इन (in), 'के अन्दर' या 'के भीतर' के लिए इनटू (into), 'पर' के लिए ऑन (on), 'के ऊपर' के लिए अपॉन (upon) और अबव या एबॅव (above) के प्रयोग को देखा जा सकता है।
'गाँव के भीतर दो स्कूल हैं', 'विधानसभा के भीतर बड़ा हंगामा हुआ', 'पेट के अंदर दर्द हो रहा है' आदि में 'के अंदर' या 'के भीतर' का प्रयोग उचित नहीं है। इन वाक्यों में 'के अंदर' या 'के भीतर' के स्थान पर 'में' का प्रयोग होना चाहिए।
'पर' और 'के ऊपर' में थोड़ा अन्तर है। 'पर' में आधार और आश्रित का स्पर्श होता है, जबकि 'के ऊपर' में आधार और आश्रित एक-दूसरे को स्पर्श नहीं करते। 'छत सिर पर है' और 'छत सिर के ऊपर है', इन दो वाक्यों के अर्थ से यह अन्तर स्पष्ट समझा जा सकता है। 'हृदयेश ने सिर पर छाता तान रखा है' में 'पर' का प्रयोग न करके, 'के ऊपर' का प्रयोग होना चाहिए, क्योंकि छाता सर को स्पर्श नहीं कर रहा, सर के ऊपर है। इसी प्रकार 'उसने आँगन पर छप्पर डाल लिया है' और 'युद्ध के दौरान नगर पर वायुयान मँडराते हैं' में 'पर' की जगह 'के ऊपर' का प्रयोग करना ठीक रहेगा।
'मेरे ऊपर दया कीजिए महाराज!', 'तुम्हारी पीठ के ऊपर चाकू के निशान हैं', 'कानून और व्यवस्था का बोझ पुलिस के ऊपर है', 'भगतसिंह के ऊपर यह आरोप लगाया गया', 'यह तो इस बात के ऊपर निर्भर है', 'कल बजट के ऊपर बहस होगी', 'भगवान् के ऊपर विश्वास करो', 'तुम्हारे मन के ऊपर भारी बोझ है', 'किताब मेज के ऊपर है', 'अपराधी की पीठ के ऊपर कोड़े लगाए गए', 'समारोह की पूरी ज़िम्मेदारी आपके ऊपर है', 'मेरे मन के ऊपर बड़ा प्रभाव पड़ा' आदि वाक्यों में 'के ऊपर' का प्रयोग उचित नहीं है। इनके सही रूप क्रमशः 'मुझ पर दया कीजिए महाराज!', 'तुम्हारी पीठ पर चाकू के निशान हैं', 'कानून और व्यवस्था का बोझ पुलिस पर है', 'भगतसिंह पर यह आरोप लगाया गया', 'यह तो इस बात पर निर्भर है', 'कल बजट पर बहस होगी', 'भगवान् पर विश्वास करो', 'तुम्हारे मन पर भारी बोझ है', 'किताब मेज पर है', 'अपराधी की पीठ पर कोड़े लगाए गए', 'समारोह की पूरी ज़िम्मेदारी आप पर है' और 'मेरे मन पर बड़ा प्रभाव पड़ा' हैं।
'अरे' और 'हे' का प्रयोग सम्बोधन में होता है, जैसे 'हे भगवान्, इस गरीब की रक्षा कीजिए', 'अरे, श्याम तुझे क्या हो गया?' आदि। 'ओ', 'ऐ', अरे' और 'रे' का प्रयोग डाँटने, आश्चर्य व्यक्त करने आदि में भी होता है। सम्बोधन में हमेशा इन शब्दों का प्रयोग नहीं होता, जैसे 'भाइयो और बहनो', 'मोहन, कहाँ थे तुम!' आदि।
कई बार 'हे' या 'ओ' के साथ आने वाले संस्कृत के शब्दों में कुछ परिवर्तन भी होता है। शब्द एकवचन हो और उसके अन्त में इकार, ईकार या आकार हो, तो वह एकार में बदल जाता है, जैसे 'हे विधे', 'हे प्रिये', 'हे बालिके', 'ओ लड़के', 'ओ बच्चे', 'हे सीते', 'हे देवि' और 'हे नदि' में क्रमशः 'विधि', 'प्रिया', 'बालिका', 'लड़का', 'बच्चा', 'सीता', 'नदी' और 'देवी' में बदलाव हुआ है। हिन्दी में 'हे नदी' या 'हे देवी' भी लिखा जा सकता है, लेकिन संस्कृत में नहीं। अन्त में उकार होने पर वह ओकार में बदल जाता है, जैसे 'हे साधो', 'हे बन्धो' आदि। ध्यान रहे कि ऐसा हर बार नहीं होता।
अब 'सहित', 'साथ' आदि के भी कुछ उदाहरण देखते हैं। 'उसने बड़े ध्यान के साथ मेरी बातें सुनीं', 'तुम्हें लगन या धैर्य के साथ अपना काम करना चाहिए', 'मैंने नम्रता के साथ केवल इतना कहा कि... ' आदि में 'के साथ' की जगह 'से' का प्रयोग होना चाहिए। 'आपकी कलम धन्यवाद सहित लौटा दी थी' में 'सहित' के स्थान पर 'पूर्वक' होना चाहिए।
'भोग विलास के लिए धन नष्ट न करो', 'इस रोग के लिए कोई इलाज नहीं', 'स्वान्तः सुखाय के लिए', 'वे सन्तान को लेकर दुखी हैं', 'वह अपनी पुस्तक की अपेक्षा दूसरे की उठा लाया', 'उन समान दूसरा कोई नहीं', 'मेरे आगे कौन ठहर सकता है?', "उसके विरुद्ध मुकदमा चलाया गया' आदि के सही रूप 'भोग विलास पर धन नष्ट न करो', 'इस रोग का कोई इलाज नहीं', 'स्वान्तः सुखाय' (इसमें 'के लिए' का भाव पहले से ही मौजूद है), 'वे सन्तान के कारण दुखी हैं', 'वह अपनी पुस्तक के बदले दूसरे की उठा लाया', 'उनके समान कोई नहीं', 'मेरे सामने कौन ठहर सकता है?' और 'उस पर मुकदमा चलाया गया' हैं।
० ० ०
जारी...
सोमवार, 14 दिसंबर 2015
कठिन नही है शुद्ध हिन्दी-भाग-44
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें